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60 फीसदी बाध्यता खत्म होने से ख्खत्म होगा कॉलेजों का सूखा
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:43 AM IST
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दाखिले के लिए 60% अंकों की बाध्यता खत्म
एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) से संबद्ध ग्रेटर नोएडा के ज्यादातर निजी कॉलेजों को संजीवनी मिल गई है। विवि ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए इंटरमीडिएट में 60 प्रतिशत की बाध्यता खत्म कर दी है। अब इंटरमीडिएट में समान्य वर्ग के 45 फीसदी और अनुसूचित जाति व जनजाति के 40 फीसदी अंक लाने वाले छात्र भी इंजीनियर बन सकेंगे।
बता दें कि एकेटीयू ने इस सत्र से कंप्यूटर साइंस, आईटी, कोर ब्रांच मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सिविल से बीटेक में एडमिशन लेने वाले के लिए इंटरमीडिएट में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया था। हालांकि विवि के आदेश से ग्रेटर नोएडा के करीब सात से आठ नामी निजी कॉलेजों को तो असर नहीं पड़ता, लेकिन बड़ी संख्या में निजी कॉलेजों की सीटें खाली रहने का डर था। इससे करीब 30 फीसदी सीटों पर असर पड़ सकता था। पिछले दिनों ग्रेटर नोएडा समेत प्रदेशभर से कॉलेजों ने एकेटीयू सहित प्रदेश शासन से भी गुहार लगाई थी। इस पर विवि ने 60 प्रतिशत अंक सीमा का आदेश वापस ले लिया।
सभी कॉलेजों को मिलेगा फायदा
फैसले से विवि से संबद्ध सभी कॉलेजों को फायदा होगा। हालांकि, नामी कॉलेज पहले ही मेरिट के आधार पर एडमिशन देते थे। जिनमें 60 प्रतिशत से अधिक अंक की सीमा होती थी, लेकिन समान्य कॉलेजों को छात्र न मिलने का खतरा था। फैसला वापस लेने से इन कॉलेजों की सीटें काफी हद तक भर सकेंगी।
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-राजीव अग्रवाल, निदेशक जीएल बजाज कॉलेज
कम अंक वालों के साथ होता अन्याय
इंजीनियरिंग में 60 प्रतिशत से अधिक लाने वाले छात्रों को एडमिशन के आदेश के बाद इससे कम अंक लाने वाले छात्रों के साथ अन्याय होता। इसी सिलसिले में कॉलेजों की ओर से प्रदेश शासन और विवि तक से गुजारिश गई थी। शासन और विवि की ओर से मामले में संज्ञान लेकर कदम वापस लिया। इससे छात्रों का भला होगा।
-मनोज अग्रवाल, निदेशक स्काई लाइन कॉलेज
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एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) से संबद्ध ग्रेटर नोएडा के ज्यादातर निजी कॉलेजों को संजीवनी मिल गई है। विवि ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए इंटरमीडिएट में 60 प्रतिशत की बाध्यता खत्म कर दी है। अब इंटरमीडिएट में समान्य वर्ग के 45 फीसदी और अनुसूचित जाति व जनजाति के 40 फीसदी अंक लाने वाले छात्र भी इंजीनियर बन सकेंगे।
बता दें कि एकेटीयू ने इस सत्र से कंप्यूटर साइंस, आईटी, कोर ब्रांच मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सिविल से बीटेक में एडमिशन लेने वाले के लिए इंटरमीडिएट में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया था। हालांकि विवि के आदेश से ग्रेटर नोएडा के करीब सात से आठ नामी निजी कॉलेजों को तो असर नहीं पड़ता, लेकिन बड़ी संख्या में निजी कॉलेजों की सीटें खाली रहने का डर था। इससे करीब 30 फीसदी सीटों पर असर पड़ सकता था। पिछले दिनों ग्रेटर नोएडा समेत प्रदेशभर से कॉलेजों ने एकेटीयू सहित प्रदेश शासन से भी गुहार लगाई थी। इस पर विवि ने 60 प्रतिशत अंक सीमा का आदेश वापस ले लिया।
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सभी कॉलेजों को मिलेगा फायदा
फैसले से विवि से संबद्ध सभी कॉलेजों को फायदा होगा। हालांकि, नामी कॉलेज पहले ही मेरिट के आधार पर एडमिशन देते थे। जिनमें 60 प्रतिशत से अधिक अंक की सीमा होती थी, लेकिन समान्य कॉलेजों को छात्र न मिलने का खतरा था। फैसला वापस लेने से इन कॉलेजों की सीटें काफी हद तक भर सकेंगी।
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-राजीव अग्रवाल, निदेशक जीएल बजाज कॉलेज
कम अंक वालों के साथ होता अन्याय
इंजीनियरिंग में 60 प्रतिशत से अधिक लाने वाले छात्रों को एडमिशन के आदेश के बाद इससे कम अंक लाने वाले छात्रों के साथ अन्याय होता। इसी सिलसिले में कॉलेजों की ओर से प्रदेश शासन और विवि तक से गुजारिश गई थी। शासन और विवि की ओर से मामले में संज्ञान लेकर कदम वापस लिया। इससे छात्रों का भला होगा।
-मनोज अग्रवाल, निदेशक स्काई लाइन कॉलेज