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86 वर्षीय बुजुर्ग को दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर लगा
Updated Fri, 28 Sep 2018 11:24 PM IST
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86 वर्षीय बुजुर्ग को दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर लगा
गुरुग्राम। सुशांत लोक स्थित पारस अस्पताल ने विश्व हृदय दिवस ( 29 सितंबर) से पूर्व 86 वर्षीय बुजुर्ग के शरीर में दुनिया का सबसे छोटा पेस मेकर लगाने का दावा किया है। ब्लॉकेज की समस्या से जूझ रहे मरीज की पहले जटिल एंजियोप्लास्टी की गई जिसके बाद स्टंट की तरह पैर के रास्ते उसमें माइक्रा इंप्लांट कर यह पेसमेकर डाला गया।
पारस अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डॉ. अमित भूषण शर्मा ने बताया कि मरीज को जिस समय अस्पताल लाया गया था उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उसकी दिल की धड़कन 28 प्रति मिनट थी। स्थिति का पता लगने के बाद जांच में पाया गया कि उन्हें प्रोक्सिमल एलएडी में 99 फीसदी ब्लॉकेज है। ऐसे में सर्जरी के दौरान बहुत अधिक रक्तस्राव का खतरा था, लिहाजा ओपन हार्ट सर्जरी के बदले माइक्रा इंप्लांट ही एकमात्र विकल्प था। इसके जरिये मरीज को पैरों के रास्ते पेसमेकर डाला गया।
उन्होंने बताया कि पेसमेकर इंप्लांटेशन के जरिये 86 साल के बुजुर्ग की जान बचाई है। इस तरह का एक अन्य मामला 2016 में ब्राजील में दर्ज हुआ था। भारत में अब तक कुल 12 मामलों में माइक्रा ट्रांसकैथेटर पेसिंग सिस्टम (टीपीएस) इस्तेमाल किया गया है। इससे रक्तस्राव का खतरा नहीं रहता, चूंकि इसमें कोई चीरा और टांके नहीं लगते। वहीं इससे मरीज में संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता है।
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गुरुग्राम। सुशांत लोक स्थित पारस अस्पताल ने विश्व हृदय दिवस ( 29 सितंबर) से पूर्व 86 वर्षीय बुजुर्ग के शरीर में दुनिया का सबसे छोटा पेस मेकर लगाने का दावा किया है। ब्लॉकेज की समस्या से जूझ रहे मरीज की पहले जटिल एंजियोप्लास्टी की गई जिसके बाद स्टंट की तरह पैर के रास्ते उसमें माइक्रा इंप्लांट कर यह पेसमेकर डाला गया।
पारस अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डॉ. अमित भूषण शर्मा ने बताया कि मरीज को जिस समय अस्पताल लाया गया था उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उसकी दिल की धड़कन 28 प्रति मिनट थी। स्थिति का पता लगने के बाद जांच में पाया गया कि उन्हें प्रोक्सिमल एलएडी में 99 फीसदी ब्लॉकेज है। ऐसे में सर्जरी के दौरान बहुत अधिक रक्तस्राव का खतरा था, लिहाजा ओपन हार्ट सर्जरी के बदले माइक्रा इंप्लांट ही एकमात्र विकल्प था। इसके जरिये मरीज को पैरों के रास्ते पेसमेकर डाला गया।
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उन्होंने बताया कि पेसमेकर इंप्लांटेशन के जरिये 86 साल के बुजुर्ग की जान बचाई है। इस तरह का एक अन्य मामला 2016 में ब्राजील में दर्ज हुआ था। भारत में अब तक कुल 12 मामलों में माइक्रा ट्रांसकैथेटर पेसिंग सिस्टम (टीपीएस) इस्तेमाल किया गया है। इससे रक्तस्राव का खतरा नहीं रहता, चूंकि इसमें कोई चीरा और टांके नहीं लगते। वहीं इससे मरीज में संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता है।
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