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कुता काटने से किशोर की मौत
Updated Mon, 17 Sep 2018 11:24 PM IST
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दो वैक्सीन लगाने के बाद भी नहीं सुधरी हालत
-कुत्ते के काटने से किशोर की मौत का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एसी नगर में किशोर की कुत्ते के काटने से मौत मामले में उसके परिजनों का आरोप है कि बीके अस्पताल में रेबीज के वैक्सीन नहीं थे। उन्हें दो बार वहां से लौटा दिया गया। इस पर उन्होंने बाजार से वैक्सीन खरीदे। दो डोज लग चुकी थी, इसके बावजूद लक्ष्य की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठ रहा था कि बाजार से खरीदे गए वैक्सीन कहीं नकली तो नहंीं थे। इस संबंध में सिविल सर्जन बीके राजौरा कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि वैक्सीन नकली हो। कई बार होता है कि जिस कुत्ते ने काटा, उसमें कीटाणु शक्तिशाली हों और जब तक पीड़ित को उपचार मिलता है वह सक्रिय हो चुके होते हैं। इसलिए कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने पर जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाने और उपचार शुरू करवाने की सलाह दी जाती है।
नगर निगम के पास नहीं है कोई व्यवस्था
लावारिस कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी करवाने के लिए नगर निगम के पास कोई व्यवस्था नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुत्तों को पकड़ कर उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर भी नहीं छोड़ा जा सकता है। उनकी रोकथाम के लिए केवल नसबंदी ही करवाई जा सकती है, मगर नगर निगम के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे उनकी नसबंदी की जा सके। कुछ समय पहले नगर निगम की पशुओं के लिए कार्य कर रही एक संस्था के साथ इस संबंध में बातचीत चल रही थी, लेकिन वह भी सिरे नहीं चढ़ी।
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रेबीज वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो जाता है, लेकिन कोशिश की जाती है कि जल्द से जल्द स्टॉक मंगवा लिया जाए। पिछले दिनों अस्पताल में वैक्सीन समाप्त थे। बृहस्पतिवार को वैक्सीन का स्टॉक आ गया था। बीके में अब वैक्सीन उपलब्ध हैं।
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- बीर सिंह सेहरावत, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, बीके अस्पताल
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दो वैक्सीन लगाने के बाद भी नहीं सुधरी हालत
-कुत्ते के काटने से किशोर की मौत का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एसी नगर में किशोर की कुत्ते के काटने से मौत मामले में उसके परिजनों का आरोप है कि बीके अस्पताल में रेबीज के वैक्सीन नहीं थे। उन्हें दो बार वहां से लौटा दिया गया। इस पर उन्होंने बाजार से वैक्सीन खरीदे। दो डोज लग चुकी थी, इसके बावजूद लक्ष्य की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठ रहा था कि बाजार से खरीदे गए वैक्सीन कहीं नकली तो नहंीं थे। इस संबंध में सिविल सर्जन बीके राजौरा कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि वैक्सीन नकली हो। कई बार होता है कि जिस कुत्ते ने काटा, उसमें कीटाणु शक्तिशाली हों और जब तक पीड़ित को उपचार मिलता है वह सक्रिय हो चुके होते हैं। इसलिए कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने पर जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाने और उपचार शुरू करवाने की सलाह दी जाती है।
नगर निगम के पास नहीं है कोई व्यवस्था
लावारिस कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी करवाने के लिए नगर निगम के पास कोई व्यवस्था नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुत्तों को पकड़ कर उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर भी नहीं छोड़ा जा सकता है। उनकी रोकथाम के लिए केवल नसबंदी ही करवाई जा सकती है, मगर नगर निगम के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे उनकी नसबंदी की जा सके। कुछ समय पहले नगर निगम की पशुओं के लिए कार्य कर रही एक संस्था के साथ इस संबंध में बातचीत चल रही थी, लेकिन वह भी सिरे नहीं चढ़ी।
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रेबीज वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो जाता है, लेकिन कोशिश की जाती है कि जल्द से जल्द स्टॉक मंगवा लिया जाए। पिछले दिनों अस्पताल में वैक्सीन समाप्त थे। बृहस्पतिवार को वैक्सीन का स्टॉक आ गया था। बीके में अब वैक्सीन उपलब्ध हैं।
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- बीर सिंह सेहरावत, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, बीके अस्पताल