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तकनीकी पेंच में फंसा जेपी का प्रोजेक्ट
Updated Wed, 14 Nov 2018 11:23 PM IST
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हेडिंग: तकनीकी पेच में फंसा जेपी का प्रोजेक्ट
वोटिंग के पेच को दूर होने के बाद ही होगा समस्या का समाधान
किसी भी कंपनी के चयन के लिए 66 फीसदी वोटिंग जरूरी
इसके बाद ही तय होगा कि कौन खरीदेगा जेपी इंफ्राटेक
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। जेपी इंफ्राटेक के प्रोजेक्ट को पूरा करने और उसे खरीदने के लिए नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) सहित कई कंपनियां कतार में हैं, लेकिन एक तकनीकी पेच ने पूरे काम को रोक रखा है। जब तक यह दूर नहीं होगा समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 32 हजार फ्लैट खरीदारों को आशियाने की रजिस्ट्री का इंतजार है। इनमें से 25 हजार फ्लैट पर कब्जा बाकी है।
जेपी के ख्ररीदार निरंजन सिंह ढींगरा ने बताया कि अलग-अलग कंपनियों का जेपी इंफ्राटेक के काम को पूरा करने या खरीदने में दिलचस्पी दिखाने की प्रक्रिया सिर्फ शुरुआती चरण है। इसका अहम मसला एनसीएलटी में है। जब तक मसले का हल नहीं निकलता मामले में एक कदम भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी। दरअसल, खरीदारों को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स में शामिल करने के बाद इनका भी वोटिंग का हक बन गया है। अब समस्या यह आ रही है कि इसमें वोटिंग के दौरान जो अनुपस्थित रहेगा। उसे निगेटिव माना जा रहा है। दूसरा यह कि अगर किसी कंपनी के चयन के लिए वोटिंग करनी है तो उसके पक्ष में 66 फीसदी वोट पड़ने जरूरी है। ढींगरा का कहना है कि ज्यादातर खरीदार अनुपस्थित रहते हैं। इस वजह से 66 फीसदी का आंकड़ा पार करना मुश्किल है। दूसरा अनुपस्थिति की वजह से निगेटिव मार्किंग से फैसले पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि मामला एनसीएलटी में गया है जहां खरीदारों की ओर से मांग की गई है कि एएमआर बिल्डर केस को ध्यान में रखते हुए वोटिंग के दौरान उपस्थित सदस्यों के वोटिंग में से ही फैसला किया जाए। यहां 66 फीसदी की लिमिट को खत्म किया जाए। साथ ही, अनुपस्थित रहने वाले खरीदारों के वोट को निगेटिव श्रेणी में न लाया जाए।
बैंकों व खरीदारों को करना होगा संतुष्ट
ढींगरा का कहना है कि चाहे वह कंपनी का चयन हो या फिर कोई बिल लाना है। हर मामले में वोटिंग जरूरी है। यहां खरीदारों का 61 प्रतिशत वोट है। इसके अलावा बैंकों व अन्य क्रेडिटर्स का वोट है। बैंक और खरीदारों को संतुष्ट करना होगा, तभी मामला आगे बढ़ पाएगा।
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प्रस्ताव आने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया
खरीदारों का कहना है कि जब तक जेपी इंफ्राटेक के लिए आने वाली कंपनी अपना प्रस्ताव नहीं रखती। तब तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता। प्रस्ताव को देखने के बाद ही यह फैसला किया जा सकेगा कि क्या सही है और क्या गलत।
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वोटिंग के पेच को दूर होने के बाद ही होगा समस्या का समाधान
किसी भी कंपनी के चयन के लिए 66 फीसदी वोटिंग जरूरी
इसके बाद ही तय होगा कि कौन खरीदेगा जेपी इंफ्राटेक
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। जेपी इंफ्राटेक के प्रोजेक्ट को पूरा करने और उसे खरीदने के लिए नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) सहित कई कंपनियां कतार में हैं, लेकिन एक तकनीकी पेच ने पूरे काम को रोक रखा है। जब तक यह दूर नहीं होगा समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 32 हजार फ्लैट खरीदारों को आशियाने की रजिस्ट्री का इंतजार है। इनमें से 25 हजार फ्लैट पर कब्जा बाकी है।
जेपी के ख्ररीदार निरंजन सिंह ढींगरा ने बताया कि अलग-अलग कंपनियों का जेपी इंफ्राटेक के काम को पूरा करने या खरीदने में दिलचस्पी दिखाने की प्रक्रिया सिर्फ शुरुआती चरण है। इसका अहम मसला एनसीएलटी में है। जब तक मसले का हल नहीं निकलता मामले में एक कदम भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी। दरअसल, खरीदारों को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स में शामिल करने के बाद इनका भी वोटिंग का हक बन गया है। अब समस्या यह आ रही है कि इसमें वोटिंग के दौरान जो अनुपस्थित रहेगा। उसे निगेटिव माना जा रहा है। दूसरा यह कि अगर किसी कंपनी के चयन के लिए वोटिंग करनी है तो उसके पक्ष में 66 फीसदी वोट पड़ने जरूरी है। ढींगरा का कहना है कि ज्यादातर खरीदार अनुपस्थित रहते हैं। इस वजह से 66 फीसदी का आंकड़ा पार करना मुश्किल है। दूसरा अनुपस्थिति की वजह से निगेटिव मार्किंग से फैसले पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि मामला एनसीएलटी में गया है जहां खरीदारों की ओर से मांग की गई है कि एएमआर बिल्डर केस को ध्यान में रखते हुए वोटिंग के दौरान उपस्थित सदस्यों के वोटिंग में से ही फैसला किया जाए। यहां 66 फीसदी की लिमिट को खत्म किया जाए। साथ ही, अनुपस्थित रहने वाले खरीदारों के वोट को निगेटिव श्रेणी में न लाया जाए।
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बैंकों व खरीदारों को करना होगा संतुष्ट
ढींगरा का कहना है कि चाहे वह कंपनी का चयन हो या फिर कोई बिल लाना है। हर मामले में वोटिंग जरूरी है। यहां खरीदारों का 61 प्रतिशत वोट है। इसके अलावा बैंकों व अन्य क्रेडिटर्स का वोट है। बैंक और खरीदारों को संतुष्ट करना होगा, तभी मामला आगे बढ़ पाएगा।
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प्रस्ताव आने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया
खरीदारों का कहना है कि जब तक जेपी इंफ्राटेक के लिए आने वाली कंपनी अपना प्रस्ताव नहीं रखती। तब तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता। प्रस्ताव को देखने के बाद ही यह फैसला किया जा सकेगा कि क्या सही है और क्या गलत।