चिड़ियाघर: प्रशासन की गलती से विजय बन गया विलेन!
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दिल्ली चिड़ियाघर में हुई घटना को 20 दिन हो चुके हैं लेकिन चिड़ियाघर प्रशासन अभी भी नहीं चेता। सफेद बाघ को करीब से देखने की चाहत में अपनी जान गंवाने वाले मकसूद के साथ जो हुआ उसे याद करके हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
इस घटना के बाद भी चिड़ियाघर प्रशासन ने सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं किए हैं। लोगों की भीड़ विजय की झलक पाने को बेताब रहती है और उसके बाड़े के आस-पास बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई एहतियात नहीं बरते जा रहे।
बाड़े के पास खड़े दो गार्डों पर सैकड़ों लोगों की भीड़ भारी पड़ जाती है और उनकी कोई भी सुनने को राजी नहीं होता। अभी भी लोग रेलिंग पर चढ़कर विजय को करीब से देखने की कोशिश करते हैं। रेलिंग के आगे वही मौत की खाईं है जहां मकसूद गिरा था।
अब तक नहीं भरा गया पानी
खतरनाक जानवरों के बाड़ों के चारो ओर गहरा नाला बनाया गया है जिस पर हर समय पानी भरा होना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। मकूसद की मौत के बाद यह सवाल उठा था कि बाघ के बाड़े के नाले में पानी क्यों नहीं था?
उस वक्त तो चिड़ियाघर प्रशासन ने नाले की सफाई होने की बात कहकर अपना बचाव कर लिया था लेकिन अब घटना के 20 दिन बीत जाने के बाद भी वो नाला वैसे ही सूखा पड़ा है।
वैसे यह हाल सिर्फ एक बाडे़ का नहीं है। गैंडा, हिरन, अफ्रीकन भैंसे के बाड़े में भी नाले सूखे पड़े हैं। नालों में पानी न होने की वजह से ये जानवर आसानी से किनारे बनी दीवार और रेलिंग तक पहुंच सकते हैं।
मकसूद की मौत के बाद यह बात सामने आई थी कि अगर बाघ के बाड़े के चारों ओर पानी भरा होता तो शायद मकसूद की जान बच सकती थी।
हर जुबां पर है विजय का नाम
चिड़ियाघर में आने वाले छोटे बच्चे हों या बड़े, हर किसी की जुबां में विजय का ही नाम है। चिड़ियाघर के भीतर हर नजर बस विजय को तलाश करती है। मकसूद वाली घटना ने विजय को विलेन बना दिया है। लोगों की नजर में अब वह एक खूनी बाघ है।
जू घूमने आए आशुतोष ने बताया कि वह सिर्फ विजय को देखने के लिए ही आए हुए हैं। काफी दिनों से प्लान कर रहे थे लेकिन समय नहीं मिल पा रहा था।
छोटे-छोटे बच्चे भी बड़ी उत्सुकता के साथ विजय को निहारते हैं। पिता के कंधे पर बैठे एक छोटे बच्चे ने कहा- 'मम्मा लुक एट दिस, इट्स विजय'। बाड़े के आसपास मौजूद गार्ड लोगों को आगे बढ़ने के लिए कहते जरूर हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। लोग खुद बच्चों को रेलिंग पर खड़ा करके बाघ दिखाते हैं।
ऐसे में कभी भी पुरानी घटना दोहरा सकती है और विजय को बिना वजह फिर खूनी और विलेन करार दिया जाएगा।