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No PUC-No Fuel: प्रदूषण के खिलाफ सख्त एक्शन प्लान लागू, अब बिना पीयूसी नहीं मिलेगा दिल्ली में ईंधन

Sat, 04 Apr 2026 02:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Apr 2026 02:08 AM IST
सार

सरकार ने वाहन प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाया है। नो पीयूसी-नो फ्यूल नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा। 

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No PUC, No Fuel: No Fuel to be Issued in Delhi Without a PUC Certificate
demo - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन एक्शन प्लान-2026 लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अब नो पीयूसी-नो फ्यूल नियम साल भर सख्ती से लागू रहेगा। 1 नवंबर से गैर-बीएस-5 भारी वाहनों की राजधानी में एंट्री बंद कर दी जाएगी।

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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन एक्शन प्लान-2026 लॉन्च किया, जिसमें प्रदूषण के सभी बड़े कारणों पर एक साथ काम करने की रणनीति बनाई गई है। पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिसमें वाहनों का धुआं, सड़क की धूल, निर्माण कार्य, औद्योगिक प्रदूषण और कचरा जलाने जैसे प्रमुख कारणों पर सख्त एक्शन प्लान लागू किया गया है। कुल 11 सेक्टर में काम होगा और हर विभाग की जिम्मेदारी तय की गई है। सीएम ने कहा कि यह सिर्फ योजना नहीं, बल्कि तय समयसीमा, तकनीक और जवाबदेही के साथ चलने वाला अभियान है।
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वाहनों पर सबसे ज्यादा सख्ती
सरकार ने वाहन प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाया है। नो पीयूसी-नो फ्यूल नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा। इसके लिए एएनपीआर कैमरे और डिजिटल सिस्टम लगाए जा रहे हैं ताकि बिना पीयूसी वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल न मिले। सबसे बड़ा फैसला यह है कि 1 नवंबर से दिल्ली में केवल बीएस-5, सीएनजी और इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को ही एंट्री मिलेगी। बिना जरूरी काम के आने वाले भारी वाहनों पर भी रोक लगाई जाएगी। प्रदूषण ज्यादा होने की स्थिति में वर्क फ्रॉम होम, दफ्तरों के समय में बदलाव और वाहनों पर अतिरिक्त पाबंदियों जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ईवी पर फोकस
सरकार का जोर निजी वाहनों को कम करने पर है। इसके लिए 2028-29 तक बसों की संख्या बढ़ाकर 13,760 करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें बड़ी संख्या इलेक्ट्रिक बसों की होगी। मेट्रो और आरआरटीएस नेटवर्क के साथ फीडर बस, ई-ऑटो और साझा सवारी को जोड़कर लास्ट माइल कनेक्टिविटी बेहतर की जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अगले चार साल में 32,000 चार्जिंग प्वाइंट लगाए जाएंगे। नई ईवी पॉलिसी में दोपहिया और कॉमर्शियल वाहनों पर खास ध्यान रहेगा, जबकि सरकारी वाहनों को भी साफ ईंधन में बदला जाएगा।

जाम और धूल पर एक्शन
दिल्ली में ट्रैफिक जाम को प्रदूषण की बड़ी वजह माना गया है। इसके लिए 62 बड़े हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां समयबद्ध सुधार होगा। साथ ही शहर में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जा रहा है। सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए वाटर स्प्रिंकलर, एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट स्प्रे सिस्टम बड़े स्तर पर लगाए जा रहे हैं। इनकी निगरानी जीपीएस और सेंट्रल डैशबोर्ड से रियल-टाइम में होगी।

सड़क और निर्माण पर निगरानी
करीब 3,500 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास किया जाएगा, जिससे धूल कम होगी। गड्ढों की समयबद्ध मरम्मत और रोड मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया जाएगा। निर्माण कार्यों पर नजर रखने के लिए एआई आधारित सीएंडडी पोर्टल 2.0 शुरू किया जाएगा, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सख्त कार्रवाई संभव होगी।

कचरा और लैंडफिल खत्म करने का प्लान
सरकार ने पुराने कचरा पहाड़ों को खत्म करने की समयसीमा भी तय की है। ओखला लैंडफिल जुलाई 2026 तक, भलस्वा दिसंबर 2026 तक और गाजीपुर दिसंबर 2027 तक हटाने का लक्ष्य है। बायोमास जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है और इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था जैसे इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराए जाएंगे।

इंडस्ट्री और निगरानी सिस्टम
औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए सभी यूनिट्स में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी सिस्टम अनिवार्य किया गया है। नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार, ग्रीन वॉर रूम और इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर बनाए जाएंगे।


जनभागीदारी और हरियाली पर जोर
सरकार वायु रक्षक टीमों और 311 प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों की भागीदारी बढ़ाएगी। इसके अलावा 2026-27 में 70 लाख पौधे लगाने और लंबे समय में एक करोड़ से ज्यादा पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है।

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