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बिना चादर के बिस्तर पर सोने को मजबूर हैं जच्चा-बच्चा, प्रसव के बाद रैक्सीन के गद्दे पर लेट रहे
Thu, 08 Aug 2019 07:24 PM IST
Prachi Priyam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
Published by: Prachi Priyam
Updated Thu, 08 Aug 2019 07:24 PM IST
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बीके सिविल अस्पताल
- फोटो : SELF
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फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में भर्ती जच्चा-बच्चा को रैक्सीन के गद्दों पर बिना चादर के लिटाया जा रहा है। हालात यह हैं कि जच्चा अपने नवजात को गर्मी से बचाने में भी बेबस हैं। हालांकि मामले की शिकायत के बाद गुरुवार दोपहर के बाद बिस्तरों पर चादरें बिछा दी गईं।
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पलवल के गांव चांदहट निवासी पूजा ने बताया कि वह बीके सिविल अस्पताल में गुरुवार सुबह डिलीवरी कराने पहुंची थीं, लेकिन सिविल अस्पताल में मरीजों के लिए व्यवस्था देख कर दंग रह गईं । पूजा की मां गुड्डी ने बताया कि अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में किसी बिस्तर पर चादर नहीं बिछी थी। स्टाफ ने आश्वासन दिया था कि सुबह के स्टाफ के आते ही व्यवस्था ठीक कर दी जाएगी।
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सुबह करीब छह बजे पूजा ने नॉर्मल डिलीवरी से बेटी को जन्म दिया। इस दौरान पूजा को भी अन्य लोगों की तरह बिना चादर वाले रैक्सीन के गद्दे पर लिटा दिया गया। प्रबंधन की तरफ से आश्वासन मिला कि सुबह आठ बजे तक बिस्तर पर चादर बिछा दी जाएगी। इस दौरान गर्मी के कारण जच्चा-बच्चा का बुरा हाल रहा।
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दोपहर करीब एक बजे तक जब किसी बिस्तर पर चादर नहीं बिछाई गई तो पूजा सहित अन्य जच्चाओं के तीमारदारों ने स्टाफ नर्स से शिकायत की। इसके बाद प्रबंधन हरकत में आया और सभी बिस्तर पर चादर बिछा कर वार्ड की सफाई कराई गई।
जच्चा-बच्चा वार्ड में तैनात नर्स ऊषा ने बताया कि अस्पताल की चादर धोने वाला धोबी सही वक्त पर चादरें नहीं देता। गुरुवार को भी उसने ऐसा ही किया। ऐसे में गुरुवार से एक नए धोबी को दिन के हिसाब से रंगीन चादरें पहुंचाने के लिए कह दिया गया है।