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दिल्ली-एनसीआर में बड़े भूकंप की आशंका से इनकार नहीं, सावधानी बरतने की सलाह

Sat, 20 Jun 2020 05:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली   Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 20 Jun 2020 05:33 AM IST
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no denying the possibility of major earthquake in Delhi-NCR
भूकंप की आशंका... - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली-एनसीआर में हाल में भूकंप के कई झटके आए हैं। ऐेसे में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के देहरादून स्थित स्वायत्तशासी संस्थान वाडिया हिमालयी भूविज्ञान संस्थान का कहना है कि ऐसे झटके असामान्य नहीं हैं। यह संकेत देते हैं कि इस क्षेत्र में तनाव ऊर्जा का निर्माण हो रहा है। इसलिए बड़े भूकंप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर सावधानी बरती जाए तो भूकंप से नुकसान कम हो सकता है।

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संस्थान ने स्पष्ट करते हुए कहा कि अब भूकंप को दर्ज करने का नेटवर्क काफी बेहतर हो गया है। इसलिए दिल्ली एनसीआर तथा आसपास के इलाकों के बेहद हलके कंपन भी आसानी से रिकार्ड हो सकते हैं। 
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हालांकि यह भी तथ्य है कि किसी भूकंप की पहले से कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती लेकिन क्षेत्र की संवेदनशीलता को ऊर्जा तनाव, फाल्ट की मैपिंग आदि से समझा जा सकता है। दिल्ली एनसीआर को दूसरे सबसे ज्यादा जोखिम वाले जोन फोर में रखा गया है। कभी-कभी कोई अति संवेदनशील जोन शांत रह सकता है, वहां छोटी तीव्रता वाले भूकंप आ सकते हैं लेकिन यह किसी बड़े भूकंप का संकेत नहीं माने जा सकते। 
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लेकिन बिना किसी अनुमान के भी बड़ा भूकंप आ सकता है। दिल्ली एनसीआर में पिछले दिनों कम तीव्रता वाले 14 झटके महसूस किए गए पर 29 मई को रोहतक में आए भूकंप की तीव्रता 4.6 थी। इसे इस तरह समझिए कि अगर कोई बड़ा भूकंप आता है तो उससे पहले आए कम तीव्रता के झटकों को उससे जोड़ दिया जाता है। इन्हें पूर्व झटके कहा जाएगा। 

लेकिन छोटे झटकों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि बड़ा भूकंप आएगा ही। लेकिन यह जरूर है कि ऊर्जा निर्माण है और जन-धन की हानि करने वाला बड़ा भूकंप आ भी सकता है।

दिल्ली एनसीआर में आए भूकंप

  • दिल्ली में 1720 ई. में 6.5 तीव्रता का भूकंप आया
  • मथुरा में 1803 ई. में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया
  • मथुरा में ही 1842 ई. में 5.5 तीव्रता का भूकंपा आया
  • बुलंदशहर में 1956 ई. में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया
  • फरीदाबाद में 1960 में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया
  • मुरादाबाद में 1966 में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया


इस क्षेत्र में क्यों आते हैं भूकंप
भारतीय प्लेट के उत्तर दिशा में बढ़ने और फाल्ट या कमजोर जोन के जरिये यूरेशियन प्लेट के साथ रगड़ने से ऊर्जा जारी होती है। जिससे झटके लगते हैं।
दिल्ली एनसीआर में कई कमजोर जोन तथा फाल्ट हैं। दिल्ली-हरिद्वार रिज, महेंद्रगढ़-देहरादून फाल्ट, मुरादाबाद, सोहना फाल्ट। दिल्ली-सरगोधा रिज। दिल्ली एनसीआर हिमालय क्षेत्र के करीब है, इसलिए भी यहां भूकंप का खतरा है।

कम आते हैं बड़े भूकंप

  • 1905 कांगड़ा 7.8 तीव्रता
  • 1934 बिहार 8.0
  • 1950 असम 8.6
  • 2005 मुजफ्फराबाद 6.7
  • 2015 नेपाल 7.8


बचाव के तरीके

  • जापान जैसे देशों ने साबित किया कि तैयारी हो तो भूकंप से नुकसान को कम किया जा सकता है। माक ड्रिल जरूरी है।
  • आपातकालीन नंबर मोबाइल में सेव करें।
  • बैकअप सप्लाई किट तैयार करें जिसमें बिस्कुट, पानी, दवाएं आदि हों।
  • भूकंप के दौरान शांत रहें। धरती का हिलना एक मिनट से भी कम के लिए होता है।
  • अंदर रहें। किसी मजबूत फर्नीचर जैसे मेज के नीचे रहें।
  • खिड़कियों तथा शीशों से दूर रहें।
  • बाहर हैं तो बिजली की लाइन से दूर रहें। 
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