एनजीटी के आदेश से परिवहन विभाग को लगा झटका
दिल्ली परिवहन विभाग ने दस साल पुराने डीजल वाहनों पर लगी पाबंदी पर रोक भले ही बढ़ा दी है मगर परिवहन विभाग को एक बड़ा झटका लगा है।
परिवहन विभाग आईआईटी दिल्ली की जिस स्टडी के आधार पर वाहनों को उम्र के लिहाज से नहीं बल्कि फिटनेस के आधार पर हटाने की बात कर रही थी, उस पर एनजीटी ने सवाल खड़े कर दिए है।
परिवहन विभाग को अब अपनी बात रखने के लिए नए सिरे से तैयारी करनी पड़ेगी। परिवहन विभाग शुरू से ही वाहनों के फिटनेस को आधार बनाने की वकालत करता रहा।
विभाग को नए सिरे से करनी होगी तैयारी
अभी तक सारी कवायद इसी को लेकर की जा रही थी। विभाग ने दिल्ली आईआईटी की एक रिपोर्ट को आधार बनाया था जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में पुराने वाहनों का प्रदूषण में भागीदारी सिर्फ एक फीसदी है।
परिवहन विभाग ने भी खुद पुराने नए वाहनों की प्रदूषण जांच करके अपनी रखी थी। मगर एनजीटी ने इन रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए है। अब परिवहन विभाग राजधानी के वाहनों की एज वाइज रिपोर्ट तैयार करने की तैयारी कर रहा है।
परिवहन विभाग के एक अधिकारी की माने तो 25 मई तक इस संबंध में फिर रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। एनजीटी के सख्त रुख को देखते हुए परिवहन विभाग के साथ केंद्र सरकार भी दस साल के बजाए डीजल वाहनों के लिए 15 साल तक चलाने की बात अगली सुनवाई में रख सकता है।