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होली पर नशे में ड्राइविंग करने वालों को रोकने के लिए एनजीओ ने चलाया अभियान

Mon, 18 Mar 2019 11:09 PM IST
राजेश सैनी एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Mon, 18 Mar 2019 11:09 PM IST
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NGO plans massive drive to check drunk driving during Holi
delhi police

उत्तर भारत में सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए दिल्ली स्थित एक एनजीओ ने होली के त्यौहार पर नशे में ड्राइविंग करने वालों को रोकने हेतु बड़े पैमाने पर अभियान चलाने की योजना बनाई है।

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यह दिल्ली में वाहन चालकों को रंगों के त्योहार के दौरान शराब पीकर गाड़ी चलाने रोकने के लिए व अपनी और दूसरों की जान सुरक्षित रखने की सीख देंगे। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और गैर सरकारी संगठन 'कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग' (CADD) के संस्थापक प्रिंस सिंघल ने कहा, "होली सबसे असुरक्षित त्योहारों में से एक है क्योंकि इस दिन बहुत से लोग नशे में गाड़ी चलाते हैं। कई लोग बाइक पर स्टंट दिखाते हैं तो कई तेज ड्राइविंग करते हैं और सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।
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लोगों को सवेंदनशील बनाने और खासतौर पर बड़ी गाड़ियां चलाने वाले लोगों के लिए "प्लीज नॉट टू ड्रिंक एंड ड्राइव" अभियान की शुरुआत की है। सिंघल ने कहा कि 2018 में होली सप्ताह के दौरान लगभग 11,000 मोटर चालकों पर मुकदमा चलाया गया। बयान में कहा गया है कि पहल के पीछे चालकों के साथ जुड़ने और सुरक्षित ड्राइविंग की आवश्यकता पर उन्हें संवेदनशील बनाना है। यह अभियान दिल्ली के पांच सीएनजी स्टेशनों - जेल रोड, द्वारका सेक्टर 20, सराय काले खान, प्रगति मैदान और सीजीओ कॉम्प्लेक्स में शुरू किया गया है।
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सिंघल ने कहा कि हर साल चौंकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं, जिसमें नशे में गाड़ी चलाना दिल्ली जैसे महानगरों में एक नियमित अभ्यास बन गया है। हर पांच में से एक ड्राइवर होली जैसे त्योहारों पर शराब के नशे में मिलते हैं। वही कम उम्र में शराब पीने वालों का आकंड़ा  हर साल 18 प्रतिशत बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सालाना 12,000 दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1,875 से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। इनमें लगभग 1,500 मौतें नशे में ड्राइविंग के कारण होती हैं।


सिंघल ने कहा, "दिल्ली घातक सड़क दुर्घटनाओं के मामले में भारत का सबसे खराब शहर है और 73.1 प्रतिशत दुर्घटनाएं ड्राइवर की गलती के कारण होती हैं।" साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि रात में ट्रॉमा सेंटरों में लगभग 50 प्रतिशत सिर में चोटें शराब से संबंधित दुर्घटनाओं के कारण होती हैं।

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