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एनसीआर में अटकीं है एमएनसी की सांसें

Thu, 30 Apr 2015 01:13 PM IST
कुशाग्र मिश्रा/अमर उजाला, वैशाली
कुशाग्र मिश्रा/अमर उजाला, वैशाली Updated Thu, 30 Apr 2015 01:13 PM IST
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NCR is the MNC's breath break.

नेपाल में भूकंप से मची तबाही से दिल्ली-एनसीआर तक हिल गया। सीस्मिक जोन-4 के अंतर्गत आने से जहां दिल्ली-एनसीआर के बाशिंदे खौफ में हैं, वहीं यहां कारोबार फैला चुकी विदेशी मल्टी नेशनल कंपनियाें (एमएनसी) की सांसें भी हैं।

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विदेश स्थित हेड ऑफिस दिल्ली-एनसीआर की अपनी इकाइयों से रोज भूकंप का अपडेट ले रहे हैं।

उन्हें चिंता है कि अगर भूकंप का खतरा बना रहता है तो फ्यूचर प्रोजेक्ट या प्रोडक्ट लांच करें या नहीं। इससे साफ है एमएनसी कि भूकंप के झटकों के साथ अपने प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक लगा सकती हैं।
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एमएनसी कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने वाली संस्था प्रिंस्टन ग्लोबल एकेडमी की सीईओ पूर्णिमा डे बताती हैं कि भूकंप की संभावना से एमएनसी फ्यूचर प्रोजेक्ट्स को पोस्टपोन कर सकती हैं।
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यही वजह है कि वे यहां की इकाइयों से भूकंप के बाद के हालातों पर रिपोर्ट ले रहीं हैं। इंटरनेशनल बिजनेज मैनेजमेंट के एक्सपर्ट डॉ. देवेंद्र अरोड़ा ने बताया कि अमेरिकन कंपनियों की चिंता अधिक है, क्योंकि वहां पर हरीकेन (तूफान) के हालात बनते हैं, जिससे कारोबारी नुकसान होता है।

साथ ही एक वजह ये भी कि अगर भूकंप आने की संभावना है तो दिल्ली-एनसीआर में कार्यरत अपने नागरिकों को वापस बुला सकते हैं। दिल्ली समेत एनसीआर के तीन जिलों नोएडा और गुड़गांव में 25 हजार मल्टी नेशनल कंपनियां हैं।

एक्सपर्ट बताएंगे, कितनी खतरनाक हैं इमारतें
क्या हॉट सिटी में बन रही ऊंची इमारतें भूकंप के झटके झेलने की क्षमता रखती हैं। भूकंप के खतरों से निपटने के लिए हम कितने तैयार हैं और क्या बिल्डर्स इमारतें बनाते समय भूकंपरोधी तकनीक का पालन करते हैं।

नेपाल त्रासदी को देखते हुए रेजिडेंट्स ने एओए से गुहार लगाई है कि वह इन इमारतों का सर्वे कराएं। एओए ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम से संपर्क साधा है। जल्द ही टीम सर्वे करेगी।

पिछले पांच वर्षों में इंदिरापुरम, वैशाली और वसुंधरा का तेजी से विकास हुआ है। इलाके में 24 फ्लोर तक की इमारतें बनी हुई हैं और आगे 38 फ्लोर तक की इमारतें बनाई जा रही हैं। इनमें कुछ इमारतें ऐसी हैं जिनकी स्वीकृति 14 फ्लोर  है लेकिन बिल्डर ने 18 से 20 फ्लोर तक का बना दिए हैं।

पूर्वानुमान से अफसर परेशान, लोग अनजान
नेपाल में हुई त्रासदी और मौसम के पूर्वानुमान से अफसरों के माथे पर बल पड़ गए हैं। विशेषज्ञों का पूर्वानुमान है कि अगला निशाना दिल्ली-एनसीआर हो सकता है।

इसके मद्देनजर अफसरों ने जनता को अनजान रख गुपचुप सुरक्षा उपाय शुरू कर दिए हैं। इसी के मद्देनजर एनडीआरएफ की चार नेपाल जाने से रोकी गई हैं।

भूकंप का कारण हिमालय क्षेत्र में धरती के अंदर चल रही उथल-पुथल को माना जा रहा है। काठमांडू के 10 फिट खिसकने से इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।


क्षेत्रीय भूगर्भ अधिकारी इंजीनियर नवीन कुमार दास का कहना है कि एनसीआर संवेदनशील है। यहां पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में मकान निर्माण के लिए गाइड लाइन तैयार करने का आग्रह किया है।

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