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Delhi NCR News: बिछौर में धूमधाम से निकला मोहर्रम का ताजिया, हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की दिखी मिसाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना।
बिछौर गांव में शुक्रवार को मोहर्रम के अवसर पर हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की याद में पारंपरिक ताजिया पूरे धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ निकाला गया। ताजिया देखने के लिए गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रही। गांव के मुख्य चौक से ताजिया जुलूस शुरू हुआ, जो गांव की विभिन्न गलियों और मुख्य मार्गों से होकर गुजरा। जुलूस के दौरान महिलाओं ने ताजिए पर धागा बांधकर मन्नत मांगीं। बाद में धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजिए को दफन किया गया। गांव के मुस्ताक, छुट्टल, बंसीलाल, सद्दीक पठान और इरफान कादरी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बिछोर का ताजिया क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। इसे देखने के लिए हर वर्ष राजस्थान के अलवर, भरतपुर, हरियाणा के फरीदाबाद सहित विभिन्न जिलों और राज्यों से लोग पहुंचते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए करबला में शहादत दी थी। उनकी याद में मोहर्रम मनाया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन दशक पहले मेवात क्षेत्र के अधिकांश बडे कस्बों और बड़े गांवों में ताजिए निकाले जाते थे, लेकिन अब यह परंपरा मुख्य रूप से जिले में बिछौर गांव तक सीमित रह गई है। गांव के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कहा कि मेवात में ईद, दीपावली और मोहर्रम जैसे सभी पर्व आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ मनाए जाते हैं। यही सामाजिक सौहार्द इस क्षेत्र की पहचान रहा है।
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पुन्हाना।
बिछौर गांव में शुक्रवार को मोहर्रम के अवसर पर हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की याद में पारंपरिक ताजिया पूरे धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ निकाला गया। ताजिया देखने के लिए गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रही। गांव के मुख्य चौक से ताजिया जुलूस शुरू हुआ, जो गांव की विभिन्न गलियों और मुख्य मार्गों से होकर गुजरा। जुलूस के दौरान महिलाओं ने ताजिए पर धागा बांधकर मन्नत मांगीं। बाद में धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजिए को दफन किया गया। गांव के मुस्ताक, छुट्टल, बंसीलाल, सद्दीक पठान और इरफान कादरी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बिछोर का ताजिया क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। इसे देखने के लिए हर वर्ष राजस्थान के अलवर, भरतपुर, हरियाणा के फरीदाबाद सहित विभिन्न जिलों और राज्यों से लोग पहुंचते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए करबला में शहादत दी थी। उनकी याद में मोहर्रम मनाया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन दशक पहले मेवात क्षेत्र के अधिकांश बडे कस्बों और बड़े गांवों में ताजिए निकाले जाते थे, लेकिन अब यह परंपरा मुख्य रूप से जिले में बिछौर गांव तक सीमित रह गई है। गांव के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कहा कि मेवात में ईद, दीपावली और मोहर्रम जैसे सभी पर्व आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ मनाए जाते हैं। यही सामाजिक सौहार्द इस क्षेत्र की पहचान रहा है।
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