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25 फीट बर्फ में दबे पर्वतारोही ने दी मौत को मात, बाहर निकल बढ़ गया मंजिल की ओर

Fri, 26 Aug 2016 06:46 PM IST
प्रद्युम्न कौशिक/अमर उजाला, बुलंदशहर
प्रद्युम्न कौशिक/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Fri, 26 Aug 2016 06:46 PM IST
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mountaineer bhupesh cheats death, came out of 25 feet ice and move forward instead coming back
पर्वतारोही भूपेश - फोटो : अमर उजाला

सात हजार मीटर ऊंची नुन चोटी को फतह करने निकले जनपद के 32 वर्षीय युवा पर्वतारोही भूपेश ने मौत को भी मात दी है। बर्फ में 25 फीट नीचे 15 मिनट तक धंसे रहे भूपेश ने हौसला नहीं हारा।

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बचाए जाने के बाद सामान्य होने में थोड़ा वक्त लगा और फिर उन्होंने अपने कदम मंजिल की ओर बढ़ा दिए। वह जम्मू-कश्मीर की सबसे ऊंची चोटी नुन (7136 मीटर) को फतह करने के लिए 28 दिन के मिशन पर हैं। टीम में उनके साथ भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों समेत 30 पर्वतारोही हैं।

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नगर के देवीपुरा निवासी भूपेश ने ‘अमर उजाला’ से बृहस्पतिवार सुबह फोन पर हुई बातचीत में बताया कि शनिवार को पर्वतारोहियों की टीम के साथ वह कारगिल की चोटी पर पहुंच गए थे। यहां टीम को बर्फीली हवा और तूफान का सामना करना पड़ा।

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बर्फ हट जाने से 25 फीट नीचे चले गए

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mountaineer stuck in snow peak crack

टीम ने वहीं बेस कैंप बनाकर रुकने का फैसला किया। उनके साथ चार बार एवरेस्ट फतह कर चुके दार्जिलिंग के मशहूर पर्वतारोही ओनंजडा शेरपा, दार्जिलिंग के ही आदित्य, चंडीगढ़ के संजू और उत्तराखंड के चनुहार भी हैं।

 

इस दौरान जब यह दल बेस कैंप से कैंप-1 की तरफ रवाना हुआ तो अचानक भूपेश के पैरों के नीचे से हिडन क्रैवास (बर्फ के ग्लेशियर के बीच एक गहरी दरार) की बर्फ हट जाने से वह 25 फीट नीचे चले गए। दल में सबसे पीछे चल रहे भूपेश की चीख सुनकर अन्य पर्वतारोहियों ने उस ओर देखा।
 

दल में मौजूद सेना के एक जवान की मदद से तत्काल बचाव अभियान चलाकर करीब 15 मिनट बाद उन्हें बाहर निकाला गया। 15 मिनट तक क्रैवास के 25 फीट नीचे रहने से भूपेश के दोनों हाथ सुन्न हो गए।
 

एक पल के लिए ऐसा लगा कि जैसे भूपेश के दोनों हाथ ठंड के कारण खत्म हो गए हों, लेकिन बचाव टीम ने उपचार कर उन्हें सामान्य कर दिया। इस घटना से भी भूपेश का हौसला कम नहीं हुआ और वह फिर नुन चोटी फतह करने निकल पड़े।


एवरेस्ट फतह करना है सपना
देवीपुरा के मोमराज सिंह के बेटे भूपेश साधारण परिवार से हैं। भूपेश का सपना एवरेस्ट को फतह करना है। भूपेश हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की करीब 20 से ज्यादा ऊंची चोटियों को फतह कर चुके हैं।

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