'मौत से जंग खत्म': छह हजार फुट से नीचे गिरे थे पर्वतारोही अनुराग, हर अंग था फेल; AIIMS में 200 दिन चला इलाज
दिल्ली के एम्स अस्पताल में छह हजार फुट से गिरने के बाद एक पर्वतारोही अनुराग को नई जिंदगी मिली है। अन्नपूर्णा पीक की चढ़ाई करने के दौरान पर्वतारोही गिर गया था। 72 घंटे तक बर्फ की मोटी परत में फंसे रहे। जिसके बाद 200 दिनों तक इलाज चला।
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करीब छह हजार फुट की ऊंचाई से गिरे 34 साल के पर्वतारोही अनुराग को डॉक्टरों ने एक नई जिंदगी दी। अन्नपूर्णा पीक की चढ़ाई के दौरान अनुराग गिर गए। करीब 72 घंटे तक 80 मीटर बर्फ की मोटी परत में फंसे रहने के बाद वह जांच दल को मिले। दल ने उन्हें तुरंत नेपाल के एक अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां करीब 20 दिन इलाज करवाने के बाद उसे दिल्ली के एम्स में रेफर कर दिया गया।
अनुराग जब दिल्ली एम्स में आए उस समय वह मल्टीपल ऑर्गन फेलियर से जूझ रहे थे। किडनी ने काम करना बंद कर दिया था, दिल, लंग्स, ब्रेन भी सही से काम नहीं कर रहे थे। करीब 174 दिन तक एम्स में इलाज चला। इस दौरान करीब 44 दिन आईसीयू में भर्ती रहे। अब अनुराग पैरो पर खड़े हैं। अनुराग मूलत: किशनगढ़, राजस्थान का निवासी है।
इस बारे में जयप्रकाश ट्रामा सेंटर एम्स से बर्न एंड प्लास्टिक विभाग के प्रमुख डॉ मनीष सिंघल ने बताया कि मरीज को काफी गंभीर हालत में लाया गया। यहां तुरंत उन्हें क्रिटिकल केयर वार्ड में भर्ती किया। जहां सात सर्जरी के बाद अनुराग आज अपने पैरों पर चलने की स्थिति में है।
संक्रमण से बचाना मुश्किल काम था : डॉक्टर सोनी
आईसीयू फिजिशियन डॉक्टर कपिलदेव सोनी ने बताया कि अनुराग को संक्रमण से बचाना काफी मुश्किल काम था। उनके अंग सही से काम नहीं कर रहे थे। शुरुआती दौर में उन्हें स्थिर करने में लंबा समय लगा। धीरे-धीरे अंगों को प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। 72 घंटे तक बर्फ में फंसे रहने के कारण दिल और दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंची थी।
इसका असर इलाज में दिखा। ठीक होने के बाद भी अभी कुछ समस्या हैं। वह काफी कुछ भूल गए हैं, लेकिन हम उम्मीद कर रहे हैं कि समय के साथ यह धीरे-धीरे सब कुछ फिर से याद आ जाएगा। डॉ कपिल ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी, क्रिटिकल केयर, एनेस्थिसियोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफोलॉजी, ट्रॉमा सर्जरी, ईएनटी, मनोचिकित्सा और यूरोलॉजी सहित नौ विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर अनुराग की जान बचायी। ठीक होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
मिली दूसरी जिंदगी
34 साल के अनुराग ने बताया कि गड्ढे में गिरने के बाद मैं होश में था। 80 मीटर गिरने के बाद भी मैं होश में था। दो ट्रेंच में गिरा लेकिन मुझे फ्रैक्चर नहीं हुआ था। गड्ढे में भी मैं अपने गोप्रो कैमरे से वीडियो बनाता रहा। लेकिन अंतिम 12 घंटे में बेहोश हो गया था। उसके बाद क्या हुआ कुछ भी याद नहीं। वह बताते है कि डॉक्टरों ने मुझे दूसरी जिंदगी दी है। अस्पताल के बेड नंबर 9 पर मैंने करीब 5.5 महीने बिताए। उन्होंने कहा कि साल 2020 से पर्वत पर चढ़ना शुरू किया था और उम्मीद है कि एक बार फिर से ठीक होने के बाद फिर से इसे शुरू करूंगा।
यह पहला केस
डॉ. मनीष ने बताया कि अनुराग जैसा केस पहला है। हालांकि इससे पहले भी आर्मी बैकग्राउंड के मामले आए हैं। अनुराग जब आया तो वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर था और इनका डायलिसिस हो रहा था। सर्जरी से पहले इन्हें स्टेबल करना जरूरी थी। हमने आने वाले दिनों में कुछ और भी सर्जरी इनके लिए प्लान किया है।