जमीन नहीं मिलने से इस औद्योगिक शहर में नहीं लगेगी मदर यूनिट
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फरीदाबाद में मदर यूनिट की उम्मीद अभी पूरी होती नहीं दिख रही है। दो दशक से मदर यूनिट की मांग उठाई जा रही है लेकिन जमीन की अड़चन के चलते सरकार ने इससे हाथ खींच लिए हैं।
प्रधानमंत्री लगातार विदेशों का दौरा कर निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं। पिछले दिनों हरियाणा में निवेश को बढ़ावा देने के लिए गुडग़ांव गुड़गांव में ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट आयोजित हुआ, जिसमें देश-विदेश की कंपनियों ने 5.85 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा।
360 एमओयू साइन हुए। इससे अलग हरियाणा सरकार ने राज्य में लाखों करोड़ों रुपये निवेश के लिए 362 अतिरिक्त एमओयू साइन किए हैं, लेकिन इन सबका फायदा राज्य की सबसे पुरानी औद्योगिक नगरी को मिलता नहीं दिख रहा है।
मदर यूनिट चाहिए तो सस्ती जमीन का बंदोबस्त करो
दरअसल, एक मदर यूनिट स्थापित करने के लिए कम से कम 800 से 1000 एकड़ जमीन का बंदोबस्त करना होगा। औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए सरकार ने इंडस्ट्रीयल मॉडल टाउन (आईएमटी) तो बना दिया है पर 1800 एकड़ की आईएमटी में महज 1000 से 2000 गज के प्लॉट काटे गए हैं। यहां मदर यूनिट लाना संभव नहीं है।
औद्योगिक संगठनों की मांग पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हाल ही में सरकार के समक्ष मदर यूनिट का मुद्दा तो उठा दिया। लेकिन सरकार ने स्पष्ष्ट कर दिया है कि मदर यूनिट चाहिए तो सस्ती जमीन का बंदोबस्त खुद ही करना होगा। सरकार ने पंचायत से लीज पर जमीन का इंतजाम करने का विकल्प जनप्रतिनिधियों को सुझाया है।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जनप्रतिनिधियों ने इसे मुद्दा भी बनाया लेकिन मोदी सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी औद्योगिक नगरी की करीब 20 हजार लघु, सूक्ष्म और मध्यम इकाइयों की मांग पूरी नहीं हो सकी है।
सीएम ने भी खड़े किए हाथ
पिछले दिनों फरीदाबाद में हुई डिजिटल रैली के दौरान शहर के उद्यमियों की मौजूदगी में मदर यूनिट का मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने उठा था, लेकिन खुद मुख्यमंत्री ने महंगी जमीन की अड़चन का हवाला देकर इसकी संभावनाओं को दरकिनार कर दिया था। अब सवाल यह उठता है कि सरकार के हाथ खींच लेने के बाद क्या जनप्रतिनिधि इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए जमीन की अड़चनें दूर करेंगे या फिर अगले चुनाव में फिर इसे मुद्दा बनाया जाएगा।
फरीदाबाद में मदर यूनिट की आस टूटती देख अब उद्यमी इसके विकल्पों पर जोर दे रहे हैं। लघु उद्योग भारती के पूर्व अध्यक्ष एमपी रूंगटा बताते हैं कि सबसे बड़ी दिक्कत राज्यों में टैक्स की असमानता को लेकर है। अगर जीएसटी लागू हो जाए तो यह दिक्कत दूर हो जाएगी। मदर यूनिट यहां हो या कहीं और इससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। इसके अलावा सभी राज्यों में बिजली की दरें एक समान करने से भी एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा।
हरियाणा में श्रम महंगा है, जबकि आसपास के राज्यों में सस्ता श्रम होना उद्योगों के विकास में बाधा है। राज्यों में न्यूनतम वेतन एक समान होना चाहिए। इन बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा तो बिना मदर यूनिट के भी यहां के उद्योग फलेंगे-फूलेंगे।
केएमपी बनेगा लाइफ लाइन
फरीदाबाद को भले ही मदर यूनिट न मिले, लेकिन सरकार केएमपी पर उद्योगों को लाने की कोशिश कर रही है। केएमपी के दोनों तरफ दो-दो किलोमीटर क्षेत्र को औद्योगिक विकास के लिए सुरक्षित रखा गया है। देश-विदेश की कंपनियों के साथ हुए 722 समझौते के तहत केएमपी पर औद्योगिक विकास के पंख लगेंगे।
मदर यूनिट की क्यों जरूरत
पड़ोसी शहर गुड़गांव और नोएडा तो फरीदाबाद की औद्योगिक क्रांति के आगे फीके पड़ रहे थे, लेकिन राजनीतिक खींचतान और मजबूत लीडरशिप न होने का खामियाजा इस शहर को भुगतना पड़ा। नतीजतन शहर की अधिकांश बड़ी यूनिटें या तो पलायन कर गईं या फिर बंद हो गईं। अब एस्कॉर्ट्स और जेसीबी जैसी इकाइयों की बदौलत औद्योगिक नगरी का आस्तित्व बचा हुआ है। फरीदाबाद में मदर यूनिट न होने से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की हालत खस्ता होती जा रही है। मदर यूनिट का सपना अगर पूरा होता है तो शहर की खोई हुई पहचान वापस लौट सकती है।
जिले में उद्योग:-
जिला उद्योग केंद्र से रजिस्टर्ड-12121
कंफर्म एरिया में रजिस्टर्ड-3674
नॉन कंफर्म एरिया में रजिस्टर्ड-8447
आईएसओ सर्टिफाइड उद्योग- 2800
20000 से ज्यादा छोटे-बड़े उद्योग हैं इस शहर में
9800 करोड़ रुपये की केपिटल इंवेस्टमेंट का अनुमान
3.20 लाख है सरकारी रिकॉर्ड में श्रमिकों की सख्या
सूक्षम उद्योगों की संख्या-10000
लघु उद्योगों की संख्या-8000
मध्यम उद्योगों की संख्या लगभग 1500
बड़े उद्योगों की संख्या 150 से ज्यादा
कायम है औद्योगिक नगरी की धमक
मारूति, होंडा, अशोक लीलैंड, यामाहा, रॉल्स रॉयल, जगुआर, बेंटले, मर्सडीज, बीएमडब्ल्यू, जेसीबी, एस्कॉर्ट्स सहित भारत, जर्मनी, जापान, फ्रांस, कोरिया और अमेरिका की कंपनियों के शहर में बनने वाले पार्ट्स सप्लाई होते हैं। इन देशों और कंपनियों में सीधी सप्लाई करने वाली इकाइयों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन टू टीयर और थ्री टीयर सिस्टम से इकाइयां एक दूसरे से बंधी हुई हैं। मदर यूनिट शहर को मिले तो मैनुफेक्चरिंग उद्योग को रफ्तार मिलेगी।