'अब तो टैक्सी से चलने में लग रहा है डर'
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साइबर सिटी के युवाओ में मोबाइल एप के सहारे टैक्सी हासिल करने का सगल बढ़ता जा रहा है। शहर में रोजाना हजारों कैब और टैक्सी इसके सहारे बुक की जाती हैं।
टैक्सी उपलब्ध कराने वाली उबेर, मेरू और ओला ने बाकायदे अपना-अपना मोबाइल एप लांच कर रखा है। जिनके सहारे इनकी पहुंच लोगों तक तेजी से बढ़ती जा रही है।
गुड़गांव आईटी-बीपीओ, कॉरपोरेट और मल्टीनेशनल कंपनियों का हब है। यहां पर काम करने वाले हजारों युवा रोजाना दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से आते हैं।
इसके गुड़गांव आने और यहां से जाने का माध्यम या तो मेट्रो है या टैक्सी। मगर लेट लाइट तक काम करने वालों के लिए टैक्सी ही एक माध्यम है। यह टैक्सी मंगाने के लिए मोबाइल एप का सहारा लेते हैं।
मोबाइल एप से बढ़ रहा कैब बुकिंग चलन
बीपीओ कपंनी में काम करने वाले वरूण कुमार बताते हैं कि जब वह रात 12 बजे के बाद छूटते हैं तो मोबाइल एप पर ही टैक्सी बुक कर लेते हैं। गुड़गांव में काम करने वाले महिला कर्मियों की संख्या भी कम नहीं है।
देर रात तक काम करने वाली महिला कर्मचारियों की कमी नहीं है। उनका कहना है कि मोबाइल एप से टैक्सी मंगाना उन्हें काफी सुरक्षित और आसान महसूस होता है। मेरू, ओला और उबेर की टैक्सी सभी की विशेष पसंद हैं।
क्योंकि इनकी सेवाएं मोबाइल एप पर उपलब्ध हैं। इन तीनों कंपनियों के एप आईस्टोर, गूगल प्ले, विंडो स्टोर और ब्लैकबेरी पर उपलब्ध हैं।
मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत महिला कर्मी अनामिका का कहना है कि दिल्ली की घटना के बाद तो टैक्सी से सफर करने में काफी डर लगने लगा है।
दहशत में हैं बीपीओ सेक्टर
साइबर सिटी के आईटी-बीपीओ सेक्टर में काम करने वाली महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं। दिल्ली की घटना के बाद महिला कर्मचारियों की सुरक्षा लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। हालांकि बीपीओ कंपनियों की ओर से नैस्कॉम और पुलिस की और से जो भी नॉर्म्स लागू हैं उसका कड़ाई से पालन कराया जाता है। बीपीओ कंपनियों का मानना है कि ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था की कमी के कारण हो रही हैं।
साइबर सिटी आईटी-बीपीओ का बड़ा हब है। यहां पर तकरीबन 80 हजार महिलाएं काम करती हैं। इनमें से अधिकतर देर रात तक की शिफ्टों में भी काम करती हैं। उनके पास घर जाने के लिए कैब के अलावा कोई और चारा नहीं होता। नैस्कॉम की ओर से भी बीपीओ और आईटी की कैब के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं।
जिनका पालन बड़ी कपंनियों की ओर से किया जा जाता है। एक बीपीओ कंपनी में काम करने वाली महिला कर्मी श्वेता बताती हैं कि अब तो गुड़गांव में काम करने में काफी डर लगता है।
वर्ल्ड बीपीओ फाउंडेशन के अध्यक्ष दीपक कपूर का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं लॉ एंड ऑर्डर में खामी के कारण होती है। उनका कहना है कि गुड़गांव ही नहीं पूरे एनसीआर में टैक्सी और रेडियो कैब सेवा बिना किसी प्रकार के वेरिफिकेशन के सड़कों पर दौड़ रही है। पुलिस को समय-समय पर वेरीफिकेशन का काम कराना चाहिए। वहीं बैक और टैक्सी कंपनियों पर छापा मारना चाहिए।