मजाक-मजाक में डॉक्टर बना टॉपर
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सीमैट में दूसरे नंबर पर रहने वाले जमशेदपुर निवासी अभिलाष मुखर्जी पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। मुखर्जी के मुताबिक, ‘मेरा खास दोस्त मैनेजमेंट की तैयारी कर रहा था। उसी का साथ देने के लिए फॉर्म भर दिया। हालांकि कोई तैयारी नहीं की थी। पेपर देने के बाद लगा कि शायद पास हो ही जाऊंगा और देखो अपने दोस्त से अधिक नंबर लेकर दूसरा स्थान हासिल कर लिया।’
एमबीबीएस डॉक्टर हेंद्रे ओमकार प्रवीण चंद्रा ने मजाक और मस्ती के बीच सीमैट का आवेदन पत्र भरा था। सितंबर 2013 में पहली बार मस्ती सूझी तो टॉप 10 और फरवरी 2014 में टॉप कर दिखाया।
डॉ. हेंद्रे परिवार का अपना अस्पताल है और एमबीबीएस करने के बाद वे उसी में प्रैक्टिस कर रहे थे। अचानक दोस्तों के साथ मैनेजमेंट परीक्षा पर चर्चा हुई और परीक्षा दे दी। डॉ. हेंद्रे कहते हैं, ‘फैमिली डॉक्टरी पेशे से है, इसलिए मैनेजमेंट क्षेत्र में जाने का कोई इरादा नहीं था। हालांकि अब जब टॉप कर ही लिया है तो एमबीए डिग्री मुंबई से लूंगा। बाद में अपनी डॉक्टरी की प्रैक्टिस करता रहूंगा।’
चंडीगढ़ के लव हैं केमिकल इंजीनियर
सेक्टर 71 निवासी लव उपाध्याय ने पंजाब विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली है। इन दिनों गुड़गांव में नौकरी कर रहे हैं। लव के मुताबिक, आजकल मार्केट में इंजीनियरिंग डिग्री के साथ मैनेजमेंट डिग्री की भी डिमांड है। इसलिए परीक्षा दी थी और छठा स्थान हासिल किया।
अब किसी अच्छे मैनेजमेंट कॉलेज से एमबीए डिग्री लेना चाहता हूं, ताकि नौकरी में तरक्की के साथ अच्छी सैलरी भी मिल सके। हालांकि सीमैट से पहले लव ने एटीएमए परीक्षा में 99.82 फीसदी अंक लेकर तीसरा स्थान हासिल किया है।
जब डॉ. हेंद्रे को फोन कर टॉपर बनने की बधाई दी तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। ‘अरे मजाक मत करो। मैंने तो मजाक और मस्ती के बीच परीक्षा दी थी। मैं टॉप कैसे कर गया।’