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जूता चुराई में एक हजार रुपये मांगने पर निकाह के पांच घंटे बाद ही तलाक

Thu, 25 Jan 2018 01:03 PM IST
इमरान अली/अमर उजाला, गाजियाबाद
इमरान अली/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Thu, 25 Jan 2018 01:03 PM IST
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marriage broken after five hour in ghaziabad

बड़े अरमानों से दुल्हन ने अपने हाथों पर पिया के नाम की मेहंदी रचाई थी। दूल्हा-दुल्हन के ‘कबूल है’ कहते ही मुबारकबाद का दौर शुरू तो हुआ, लेकिन चंद घंटों में ही पंडाल में तलाक का सन्नाटा पसर गया। जूता चुराई में एक हजार रुपये मांगने की जरा सी बात पर ऐसा विवाद हुआ, जो बसने से पहले ही गृहस्थी को उजाड़कर ही खत्म हुआ।

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सभी को अपनी मूंछें नीची न होने की परवाह थी, लेकिन तलाक के शोर में किसी को दुल्हन के सपने चकनाचूर होने की आवाज तक नहीं आई। गढ़ के एक मोहल्ले के युवक की बारात मंगलवार को क्षेत्र के एक गांव में आई थी। यहां बारातियों की खूब आवभगत की गई।
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निकाह के बाद विदाई से पहले सलामी (मिलाई) की रस्म होने लगी। विदाई से ऐन पहले जूता चुराई की रस्म शुरू हो गई। जूते चुराने वाली दुल्हन की बहनों और सहेलियों ने दूल्हे से जूते लौटाने के एवज में एक हजार रुपये मांगे।
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तभी दूल्हे के एक परिजन ने कहा कि एक तो इतना कम दहेज दिया है, ऊपर से एक हजार रुपये मांग रही हो। इतने रुपये नहीं दिए जाएंगे। इस बात पर वहां मौजूद दुल्हन के जीजा ने कड़ा एतराज जताया, तो दूल्हे के साथ मौजूद कुछ युवकों ने जीजा से अभद्रता करनी शुरू कर दी।

देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। लड़की पक्ष ने दुल्हन को विदा करने से साफ इंकार कर दिया। लड़का पक्ष ने तेवर दिखाए, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर लड़की वालों ने दूल्हा, उसके परिजन और रिश्तेदारों समेत दर्जनों बारातियों को चौपाल पर बंधक बना लिया।

गांव के प्रधान समेत गणमान्य लोगों को भी बुला लिया गया। कई घंटे तक दोनों पक्षों में वार्ता का दौर चला, लेकिन बिगड़ी बात बन नहीं पाई। निकाह के करीब पांच घंटे बाद देर रात एक बजे शरिया कानून के तहत दोनों का तलाक करा दिया गया। सगाई और शादी के दौरान हुए खाने आदि पर हुए खर्चे की 2.52 लाख रुपये की रकम भी दूल्हा पक्ष को अदा करनी पड़ी।

शहर काजी मौलाना हाजी सैयद कसीमुद्दीन का कहना है कि अगर विदाई से पहले लड़की का तलाक हो गया है, तो फिर उसे शरई कानून के तहत इद्दत नहीं करनी होगी। वहीं पुलिस ने मामले की जानकारी से इंकार किया है।


बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुबोध त्यागी, सीएस यादव और चौधरी अमरपाल सिंह का कहना है कि हाल ही में तीन तलाक के खिलाफ कानून बना है। अगर विशेष परिस्थिति में आपसी सहमति से तलाक होता है और महिला इस संबंध में शिकायत नहीं करती है तो फिर कोई कार्रवाई नहीं हो पाएगी।

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