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निर्णय पर टिकीं सबकी नजरें: 'मैरिटल रेप' के अपराधीकरण पर दिल्ली हाईकोर्ट कल सुनाएगा फैसला, पढ़ें मामले से जुड़ीं अहम बातें

Tue, 10 May 2022 07:00 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 10 May 2022 07:00 PM IST
सार

वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण पर न्यायालय कल फैसला सुनाएगा।  केंद्र ने एक हलफनामा दायर कर अदालत से याचिकाओं पर सुनवाई टालने का आग्रह किया था। जिसमें कहा गया था कि वैवाहिक दुष्कर्म का अपराधीकरण देश में बहुत दूर तक सामाजिक-कानूनी प्रभाव डालता है।

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marital rape criminalisation relating Delhi High court judgement on tomorrow
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण पर दिल्ली उच्च न्यायालय कल फैसला सुनाएगा। उच्च न्यायालय ने वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध घोषित करने के मामले में पक्ष रखने के लिए बार-बार समय मांगने पर केंद्र सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने केंद्र को समय प्रदान करने से इनकार करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

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न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष केंद्र ने तर्क रखा था कि उसने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मुद्दे पर उनकी टिप्पणी के लिए पत्र भेजा है। केंद्र के अधिवक्ता ने कहा कि जब तक इनपुट प्राप्त नहीं हो जाते, तब तक कार्यवाही स्थगित कर दी जाए।
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परामर्श के बाद ही अपना पक्ष रख पाएंगे

पीठ के पूछने पर कहा कि अभी तक किसी राज्य सरकार से संचार पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। एसजी मेहता ने भी तर्क दिया था कि आम तौर पर जब एक विधायी अधिनियम को चुनौती दी जाती है तो हमने एक स्टैंड लिया। लेकिन वे वाणिज्यिक या कराधान कानून हैं। ऐसे बहुत कम मामले होते हैं जब इस तरह के व्यापक परिणाम मिलते हैं, इसलिए हमारा स्टैंड है कि हम परामर्श के बाद ही अपना पक्ष रख पाएंगे।


 

याचिकाओं पर पक्ष रखने के लिए दिया था दो सप्ताह का समय

अदालत भारतीय दुष्कर्म कानून के तहत पतियों को दी गई छूट को खत्म करने की मांग वाली याचिकाओं पर विचार कर रही है। उच्च न्यायालय ने सात फरवरी को केंद्र को वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण की मांग वाली याचिकाओं पर अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। केंद्र ने एक हलफनामा दायर कर अदालत से याचिकाओं पर सुनवाई टालने का आग्रह किया था, जिसमें कहा गया था कि वैवाहिक दुष्कर्म  का अपराधीकरण देश में बहुत दूर तक सामाजिक-कानूनी प्रभाव डालता है और राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ एक सार्थक परामर्श प्रक्रिया की आवश्यकता है।

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