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बजट: नोटबंदी के बाद मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को मिले ऑक्सीजन
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 26 Jan 2017 12:18 AM IST
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नोटबंदी ने उद्योग जगत के लिए भी अनिश्चितता का माहौल बना दिया। टैक्स कलेक्शन तो बढ़ा लेकिन इंडस्ट्रियल ग्रोथ रुक गई। पिछले वर्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली ने महंगाई को नियंत्रण में रखने, वित्तीय घाटे को कम करने और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को ध्यान में रखकर बजट पेश किया था लेकिन आठ नवंबर को अचानक हुई नोटबंदी की घोषणा ने औद्योगिक विकास की रफ्तार को थामने का काम किया। नोटबंदी के बाद एक फरवरी को वित्त मंत्री एक बार फिर आम बजट पेश करने जा रहे हैं। इस बजट से उद्योगों की क्या उम्मीदें हैं, यह जानने की कोशिश की गई। पेश है रिपोर्ट:-
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प्रत्यक्ष कर में मिले राहत
जीएसटी को लागू करने की तैयारी सरकार ने कर ली है। ऐसे में इस बजट में अप्रत्यक्ष कर को लेकर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है। जिस तरह जीएसटी के माध्यम से अप्रत्यक्ष कर का बोझ कम करने की कवायद हो रही है, उसी तरह इस बजट में प्रत्यक्ष कर से उद्योगों को राहत देनी चाहिए।
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आयकर के टैक्स स्लैब की सीमा को 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किए जाने से उद्योग और व्यापार पनपेगा। इसके साथ ही नोटबंदी के बाद कैश विड्रॉवल पर किए गए टैक्स प्रोविजन को हटाया जाना चाहिए। -एमपी रूंगटा, पूर्व संयोजक-लघु उद्योग भारती
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नोटबंदी की वजह से उद्योगों को नुकसान तो हुआ ही है। मेरा 100 प्रतिशत कारोबार एक्सपोर्ट ओरिएंटेड है लेकिन फिर भी लेबर और अन्य वजह से उत्पादन प्रभावित रहा। सरकार को नोटबंदी के इफेक्ट से उबरने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। मुझे उम्मीद है कि सरकार इस बार बजट में इनोवेशन और टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान देगी। भारतीय युवा स्टार्टअप में बेहतर सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सरकार को फंड और तकनीकी सहायता पर जोर देना होगा। - प्रदीप मोहंती, उपाध्यक्ष-फरीदाबाद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज
सरकार उद्योगों के लिए बेहतर माहौल बनाने की जो बातें कर रही हैं उनका वास्तविक क्रियान्वयन भी किया जाना चाहिए। इस बार बजट अनिश्चितताओं को दूर करने और नियमों को तर्कसंगत बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडस्ट्री को बढ़ावा मिले, ऐसे प्रावधान इस बार बजट में हों, ताकि एनसीआर का उद्योग नोटबंदी की मार से उबरे। कर कानून सरल और पारदर्शी होंगे तो निश्चित रूप से उनका पालन होगा। - लव मल्होत्रा, अमर उजाला एमएसएमई अवार्ड विजेता
एक्साइज ड्यूटी में राहत की उम्मीद
नवंबर में नोटबंदी की घोषणा ने अर्थव्यवस्था के पक्ष में रहे पहलुओं को भी अनिश्चितता की स्थिति में ला दिया है। मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा। हालांकि जीएसटी जुलाई से लागू होने की संभावना जताई जा रही है लेकिन इस बार बजट में माइलेज लेने के लिए सरकार एक्साइज ड्यूटी में 3 से 4 प्रतिशत की कमी ला सकती है। ये उद्योगों के लिए शॉर्ट टर्म राहत होगी। सरकार को मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा उपकरण के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों पर विश्वास जताने की बड़ी जरूरत है।
- एसएस बांगा, सदस्य-सार्क चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज