यमन युद्ध में घायलों का यहां चल रहा इलाज, यूएई सरकार ने की मदद
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यमन में तीन वर्ष से चल रहे युद्ध के घायलों को गुरुग्राम में जीवन की रोशनी मिल रही है। भारत सरकार के मेडिकल-डिप्लोमेसी के तहत में एक साथ यमन से 53 घायल लोग इलाज के लिए यहां पहुंचे हैं। इनमें 8 सैनिक के साथ वहां के नागरिक हैं।
वो न केवल बम के धमाके से घायल हुए हैं, बल्कि पोस्ट वार साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर से भी ग्रस्त हैं। इनमें दो बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें न तो बम का इल्म है और न ही युद्ध का, मगर आज बम के धमाके ने कभी न भूलने वाला दर्द दे दिया है। इन सभी को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सरकार की मदद से यहां लाया गया है।
इन्हीं में शामिल है 10 वर्ष का अराफात अब्दुल। घर के बाहर खेलते हुए एक धमाका हुआ और उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। यमन के अदन बंदरगाह (एडेन पोर्ट) का रहने वाला हसन उस मंजर को कभी नहीं भूल पाता, जब वो बम धमाके का शिकार हुआ था। लेकिन आंख से भी ज्यादा बड़ा दर्द ये है कि युद्ध में अपने पिता को खो चुका है।
अराफत के चचा अब्दुल हब उसकी आंख के इलाज के लिए मानेसर के वीपीएस रॉकलैंड अस्पताल लेकर आए हैं। इसी तरह 6 वर्षीय हसन है। जिसकी बम धमाके में आंख की रोशनी चली गई है। अब इन दोनों का गुरुग्राम में इलाज चल रहा है। जल्द ही इनकी आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद है।
इसके अलावा इन घायलों में अधिकतर ऐसे हैं, जो गोलियों और बम-धमाकों की चोटों के साथ-साथ बुरी तरह जख्मी हो गए थे। कुछ के तो पैर तक डॉक्टरों को काटने पड़े हैं। कुछ अब भी मानसिक तौर से भी पीड़ित हैं।
इनके इलाज करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक, ये सभी पोस्ट-वॉर साइक्लोजिकल डिसओर्डर से ग्रस्त हैं। यही वजह है कि इन सभी घायलों की ऊपरी घाव भरने के साथ साथ इन सभी की साइकिलोजिक्ल काउंसलिंग भी की जा रही है।
कुछ महत्वपूर्ण जानकारी
-तीन सालों से यमन में बने हुए हैं युद्ध के हालात
-बेहतर इलाज के लिए यूएई जैसे देश इलाज के लिए भारत भेज रहे हैं
-गृह युद्ध के रूप में 2015 से शुरू हुआ था यमन में युद्ध
-अल-हुथी नाम के विद्रोही संगठन ने सरकार का तख्ता पलट कर राजधानी साना पर कब्जा किया था
-यूएई व सऊदी अरब ने यमन का साथ देकर अल-हुथी के खिलाफ जंग छेड़ दी
-ईरान ने हुथी संगठन का समर्थन कर युद्ध को बढ़ावा दिया
यूएई सरकार के प्रवक्ता जेसर सालेर ने कहा कि 74 लोग यमन से आए हैं। इनमें 53 मरीज हैं और बाकी तीमरदार हैं। युद्ध के कारण उन्हें कई तरह की समस्याएं है। ये सभी लोग सुबह उठाने पर चौंककर उठ जाते हैं, थोड़ी सी भी तेज आवाज से डर जाते हैं। धीरे-धीरे सब ठीक हो रहा है।