ये खास किरदार करने की तमन्ना रखते हैं मनोज वाजपेयी, बोले मेरी राजनीतिक समझ अच्छी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या फिल्मों से समाज को बदला जा सकता है?
नहीं मेरा मानना है फिल्मों से समाज को बदलना संभव नहीं है। सामाजिक आंदोलन के जरिये जागरूरता लाई जा सकती है। बदलाव के आंदोलन में फिल्में जागरूक करने का अपना रोल अदा कर सकती हैं। फिल्मों पर इसी सोच के तहत तरह तरह की बंदिशें लगाई जाती हैं कि इनसे समाज प्रभावित होता है। इसी वजह से अपने देश में कला और संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जाता है।
क्या आप राजनीति में आने में दिलचस्पी रखते हैं?
मैं राजनीति की बड़ी अच्छी समझ रखता हूं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप जीतेंगे यह मैंने अपने करीबी लोगों को पहले ही बता दिया था। मैं दिल्ली में अपने पत्रकार दोस्तों से जब बात करता हूं तो वे भी हैरान रह जाते हैं कि जो बातें उन्हें दिल्ली में रहकर पता नहीं वे मैं मुंबई में रहकर कैसे जान लेता हूं। मैं खबरों के पीछे छिपी खबर को पढ़ लेता हूं।
अब फिल्मों पर आते हैं, सत्या के सीक्वल की क्या उम्मीद है?
अभी तो ऐसा कुछ नहीं लगता। यह बात तो बेहतर फिल्म के निर्देशक ही बता सकते हैं।
आप ज्यादातर निगेटिव किरदार ही निभाते हैं जबकि आपका अपना एक फैन ग्रुप है जो आपसे बेहतर भूमिकाओं की उम्मीद करता है?
नहीं सभी तरह के रोल तो किए हैं, अभी तो काफी समय से निगेटिव रोल नहीं किए।
ये है गली गुलियां की कहानी
अपनी नई फिल्म गली गुलियान के बारे में बताइए।
खुदूस नामक शख्स की कहानी है। जो मानसिक रूप से उलझा हुआ है, वह बाहर की दुनिया से कटा है, पुरानी दिल्ली की गली गुलियान में रहता है। समाज चाहता है वह वहां से चला जाए, वह जाना नहीं चाहता। एक बच्चे को जब उसका बाप बुरी तरह पीटता है तो वह एक बच्चे को बचाना चाहता है। कुछ ऐसी ही कहानी है।
कोई ऐसा रोल जो आप करना चाहते हों?
बहुत से रोल करना चहात हूं, समाजा में ऐसे कई किरदार हैं। फिल्मों के लेखकों को आइडिया देता हूं कि इन पर लिखो।
एक्टर नहीं होते तो क्या होते?
मैं किसान परिवार से हूं। सबसे बड़ा बेटा। जाहिर सी बात है अगर अभिनेता नहीं होता तो किसान होता। किसान नहीं बनने की परंपरा को मैंने ही तोड़ा। मेरा परिवेश ऐसा है इसी वजह से गैंग्स आफ वासेपुर जैसी फिल्में सहजता से कर लेता हूं।
क्या कभी फिल्म बनाएंगे या डायरेक्टर के रोल में भी दिखेंगे?
मेरी दूसरी को प्रोड्यूस की हुई फिल्म भोसले है जिसे कई जगह सराहा जा रहा है, डायरेक्ट करने की भी सोच रहा हूं।