हमारी सरकार ने पिछले चार साल से फीस नहीं बढ़ने दी : मनीष सिसोदिया
- गलत तरीके से फीस बढ़ाने पर एपीजे स्कूल पर चला दिल्ली सरकार का डंडा
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देश में केवल हमारी सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगा रखी है। प्राइवेट स्कूलों की लूट से हमने पैरेंट्स को बचाया है। हमारी सरकार ने पिछले चार साल से फीस नहीं बढ़ने दी है। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कांफ्रेंस में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, एपीजे स्कूल, शेख सराय का पिछले 7 साल का ऑडिट करवाने के बाद अनेक गड़बड़ियों का पता चला है। सरकार और कोर्ट के आदेश के बावजूद एपीजे स्कूल, शेख सराय ने फीस बढ़ाई। इस स्कूल ने सरकार से भी इजाजत नहीं ली जो कि कानूनी तौर पर जरूरी है।
पैरेंट्स की शिकायत के बाद हमने इस स्कूल का पिछले सात साल का ऑडिट करवाया। ऑडिट से पता चला है कि एपीजे, शेख सराय स्कूल के पास 30 करोड़ 85 लाख रुपए का सरप्लस है। करीब 31 करोड़ रुपए का सरपल्स होने के बावजूद इस स्कूल ने 7वां वेतन आयोग लागू नहीं किया है। टीचर्स को ये स्कूल 7वें वेतन आयोग के हिसाब से सैलरी नहीं दे रहा है। इस स्कूल ने हर साल ट्यूशन फीस, डेवलपमेंट चार्जेस इत्यादि में 10 से 25 फीसदी तक फीस की बढ़ोतरी की है।
ऑडिट में ये बात भी सामने आई है कि 2018-2019 के सत्र में इस स्कूल को जितनी फीस लेनी चाहिए थी, उससे 2 करोड़ 09 लाख रुपए ज्यादा फीस ली है। हमने आदेश दिया है कि ये 2 करोड़ 09 लाख रुपए पैरेंट्स को वापस किया जाए। अगर 30 दिन के अंदर एपीजे स्कूल ने वापस नहीं किया तो स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली के पैरेंट्स से शिक्षा मंत्री ने कहा, जिन स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए सरकार से परमीशन की जरूरत थी हमने उनको परमीशन नहीं दी है, उनको तो बिलकुल भी बढ़ी हुई फीस देने की जरूरत नहीं है। अगर कोई स्कूल बढ़ी हुई फीस मांगता है, तो हमें बताइए।
कामर्शियल कांप्लेक्स का किराया भी स्कूल में नहीं आ रहा है, बल्कि इनके ट्रस्ट में जा रहा है। इसके अलावा स्कूल फीस से इन्होंने 4.5 करोड़ खर्च करके एक बिल्डिंग बनवाई। उसके पीछे स्कूल का तर्क है कि हमारी बिल्डिंग पुरानी हो गई है, हम नई बिल्डिंग बनवाना चाह रहे हैं, लेकिन कानून के मुताबिक नई बिल्डिंग बनाने का काम सोसाइटी को अपने पैसे से करना होता है, ये बच्चों की फीस से नहीं किया जा सकता। स्कूल का तर्क था कि हमारी बिल्डिंग टूट गई है, हम नई बिल्डिंग बनवा रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि इन्होंने अपने स्कूल का विस्तार किया। उसमें इंटरनेशनल स्कूल नाम से एक नया स्कूल खोला।
हैरानी की बात ये है कि इंटरनेशनल स्कूल के स्टाफ की मोटी सैलरी, एपीजे स्कूल के बच्चों की फीस से ली जाने वाली रकम से दी जा रही है। वहीं, इंटरनेशनल स्कूल में जो फीस ली जा रही है, वह किसी और एकाउंट में जा रही है। शिक्षा मंत्री ने ये भी कहा, इसके अलावा इस स्कूल ने हाउस कीपिंग इत्यादि के नाम पर 5 करोड़ 62 लाख रुपए के बढ़े हुए बिल लगा रखे हैं लेकिन इनके आधे की डिटेल्स भी नहीं दे पाए। ये टीचर्स की ग्रेच्यूटी नहीं दे रहे हैं। स्टाफ को पीएफ नहीं दे रहे हैं।
इतना ही नहीं, इन्होंने अवंती टयूशन कोचिंग क्लासेस चला रखा है, जो कि गैर-कानूनी है। एक साल के अंदर स्कूल ने 62 लाख रुपए पब्लिसिटी पर खर्च किए। गूगल पर खूब विज्ञापन दिए हैं। ऐन्युल चार्जेस का 70 फीसदी इन्होंने विज्ञापन पर खर्च किया है। मनीष सिसोदिया ने कहा, सुप्रीम कोर्ट की दुग्गल कमेटी के हिसाब से कोई भी स्कूल केवल रजिस्ट्रेशन फीस, ट्यूशन फीस और ऐन्युअल चार्जेस ले सकता है। इसके अलावा अगर वह कोई अन्य सुविधा दे रहा है तो उस सुविधा की फीस केवल उसी स्टूडेंट्स से ली जाएगी, जिसको ये सुविधा दी जा रही है लेकिन एपीजे स्कूल, शेख सराय ने स्वीमिंग,स्केटिंग, इंटरनेशलन कैरिकुलम के नाम पर सभी बच्चों से फीस ली हुई है।
इसके अलावा, इस स्कूल ने ओरिएंटेशन क्लासेज के नाम पर हर पैरेंट्स से 50 हजार रुपए लिए हैं। इतना ही नहीं, 31 करोड़ रुपए सरप्लस के अलावा इस स्कूल ने 3.25 करोड़ रुपए और जमा कर रखा है जो बच्चों की कॉशन मनी है। इस स्कूल ने बच्चों को उनकी कॉशन मनी वापस नहीं की है।