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डिफेंस के सीक्रेट उपकरण बनाने वाले इंजीनियर तल रहे हैं पकोड़े...

Fri, 02 Nov 2018 07:52 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Nov 2018 07:52 PM IST
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making defense Secret equipment Engineers are frying Pakora
frying Pakora

भारत सरकार के सार्वजनिक संस्थान, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के इंजीनियर, जो 44 साल से डिफेंस के लिए कुछ सीक्रेट उपकरण बना रहे थे, आज वे पकोड़े तल रहे हैं। सैंकड़ों इंजीनियर आसपास के गरीब लोगों को पहले भरपेट पकोड़े खिलाते हैं और उसके बाद अपने हितों की लड़ाई में जुट जाते हैं।

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ये सब आपको गाजियाबाद के औधोगिक क्षेत्र साहिबाबाद स्थित सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बाहर देखने को मिलेगा। इंजीनियर एसोसिएशन का कहना है कि लाभ में चल रहे इस संस्थान को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है। यहां काम करने वाले इंजीनियर और उनके परिजनों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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सीईएल ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव नेपाल सिंह सैनी, वीरेंद्र सिंह और किरण पाल भारती का कहना है कि सोलर क्षेत्र में देश का यह सबसे अहम संस्थान है। इसमें सोलर सैल, सोलर मॉडयूल व सोलर पावर प्लांट आदि का निर्माण होता है।
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जब देश के दूरदराज के इलाकों में कोई भी प्राइवेट संस्था जाने के लिए तैयार नहीं थी, तब इसी संस्थान ने वहाँ जाकर उन इलाकों को प्रकाशमय किया। इस संस्थान ने रेलवे सेफ्टी के उपकरण स्वदेशी तकनीक के द्वारा पर तैयार किए हैं। इसके अलावा इस संस्थान ने रक्षा क्षेत्र में रडार में लगने वाले कुछ सीक्रेट उपकरण स्वत: रिसर्च कर तैयार किए हैं।

फिलहाल 1000 करोड़ रुपए के ऑर्डर कंपनी के पास हैं।

लगभग 15 वर्षों से इस संस्थान ने रक्षा क्षेत्र में काम कर रही कम्पनी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की मांग की लगातार आपूर्ति की है। इससे सरकार के करोड़ों रुपये बचे हैं। साथ ही सीईएल उन उत्पादों पर भी कार्य कर रही है जो आज सेना द्वारा आयात किए जाते हैं।

नेपाल सिंह सैनी ने कहा, संस्थान का 100 करोड़ से ज्यादा रुपया बाजार में पड़ा है। फिलहाल 1000 करोड़ रुपए के ऑर्डर कंपनी के पास हैं। इतना सब कुछ होने के बाद भी सरकार इस संस्थान को प्राइवेट हाथों में देना चाहती है और वह भी ओने पौने दामों में। सरकार ने इस कंपनी की ऐसेट वैल्यू केवल 50 करोड़ लगाई है, जबकि संस्थान के पास 50 एकड़ (लगभग 2 लाख गज) जमीन भी है। इस कंपनी की कुल वैल्यू 2000 करोड़ रुपए से अधिक होना चाहिए।

यहां 400 परमानेंट कर्मचारी तथा 600 कर्मी कॉन्ट्रैक्ट पर हैं। इस संस्थान के कर्मचारी 8 अक्टूबर 2018 से कंपनी के निजीकरण के विरोध में अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुन नहीं रही है। इंजीनियर अपने हाथों से पकोड़े तल कर झंडापुर के गरीब बच्चों को खिला रहे हैं। इस बाबत मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी और केंद्र के मंत्रियों से भी गुहार लगाई है, लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली।

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