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Delhi NCR News: संजय डांगी और अमित डांगी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर रद्द
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मनी लॉन्ड्रिंग जांच में जारी लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने 16 अक्टूबर के आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं के जांच में सहयोग और विदेश यात्रा रोकने के पर्याप्त औचित्य के अभाव में एलओसी जारी रखना उचित नहीं है।अदालत ने कहा कि आगे की जांच लंबित होने मात्र से किसी व्यक्ति के विदेश यात्रा के अधिकार पर अनिश्चितकालीन रोक नहीं लगाई जा सकती। विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। संजय डांगी की याचिका पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के जारी प्रक्रिया का पालन करने के बावजूद आक्षेपित एलओसी को अनिश्चित अवधि तक जारी रखना चौंकाने वाला अनुपातहीन होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके निष्कर्ष जांच में लगे आरोपों के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं करते और यदि नया साक्ष्य या बदली परिस्थितियां सामने आती हैं तो ईडी कानून के अनुसार आगे बढ़ सकता है। दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं को एक महीने के भीतर ईडी को शपथपत्र देने का निर्देश दिया। इसमें वे जांच में सहयोग, कानूनी समन पर उपस्थित होने और अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में मौजूद दस्तावेज या सामग्री पेश करने का वचन देंगे।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मनी लॉन्ड्रिंग जांच में जारी लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने 16 अक्टूबर के आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं के जांच में सहयोग और विदेश यात्रा रोकने के पर्याप्त औचित्य के अभाव में एलओसी जारी रखना उचित नहीं है।अदालत ने कहा कि आगे की जांच लंबित होने मात्र से किसी व्यक्ति के विदेश यात्रा के अधिकार पर अनिश्चितकालीन रोक नहीं लगाई जा सकती। विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। संजय डांगी की याचिका पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के जारी प्रक्रिया का पालन करने के बावजूद आक्षेपित एलओसी को अनिश्चित अवधि तक जारी रखना चौंकाने वाला अनुपातहीन होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके निष्कर्ष जांच में लगे आरोपों के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं करते और यदि नया साक्ष्य या बदली परिस्थितियां सामने आती हैं तो ईडी कानून के अनुसार आगे बढ़ सकता है। दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं को एक महीने के भीतर ईडी को शपथपत्र देने का निर्देश दिया। इसमें वे जांच में सहयोग, कानूनी समन पर उपस्थित होने और अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में मौजूद दस्तावेज या सामग्री पेश करने का वचन देंगे।