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राष्ट्रवाद व विकास में फंसी पश्चिमी दिल्ली संसदीय सीट, मतदाताओं की अपेक्षाएं भी जुदा-जुदा

Sat, 11 May 2019 01:56 AM IST
Vikas Kumar संतोष कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
संतोष कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 11 May 2019 01:56 AM IST
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lok sabha elections 2019 West Delhi Parliamentary seat stuck in nationalism and development
मतदाता - फोटो : अमर उजाला

मिली-जुली बसावट वाली पश्चिमी दिल्ली लोक सभा सीट के मतदाताओं की अपेक्षाएं भी जुदा हैं। दिल्ली देहात खेती-किसानी के बेहतर माहौल की उम्मीद पाले है तो अनधिकृत कॉलोनियां विकास की बाट जोह रही हैं। पॉश कालोनियों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति का इंतजार है। यहां का मतदाता राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी फिक्रमंद है। कुल मिलाकर भाजपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) के त्रिकोणीय मुकाबले में पश्चिमी दिल्ली विकास व राष्ट्रवाद के बीच फंसी हुई है।

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पश्चिमी दिल्ली में करीब 50 गांव आते हैं, जहां खेती होती है। यहां जाट व यादव समुदाय के लोगों की अधिकता है। किसानों की मानें तो कोई भी सरकार उनकी बेहतरी के लिए ठोस कदम नहीं उठा सकती है। यहां सिंचाई की सुविधा तक नहीं है। बारिश के पानी का ही आसरा रहता है। इसके अलावा छावला, कैर, मितराऊं, ढिचाऊं कलां, बापडौला जैसे गांवों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। ढिचाऊं कला के किसान धर्म सिंह बताते हैं कि सरकारें तो आती-जाती रही हैं, समस्याएं भी खत्म नहीं होंगी, लेकिन देश रहेगा तभी हम किसान रहेंगे और सरकार भी।
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दूसरी तरफ नजफगढ़, मटियाला, उत्तम नगर, मादीपुर व द्वारका के कई इलाकों में अनधिकृत कॉलोनियों की भरमार है। सरकारों के आने-आने के क्रम में इन इलाकों में अभी तक सड़क, सीवर, पानी, नाली जैसी बेहद जरूरी सुविधाओं का विकास नहीं हो सका है। पूर्वांचल समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मटियाला के राजकुमार बताते हैं कि पिछली बार की तुलना में इस बार कांग्रेस मजबूत हुई है। फिर भी, आप व भाजपा को कितना टक्कर दे पाएगी, इसका पता 23 मई को ही चल सकेगा।
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इसके अलावा हरिनगर, तिलक नगर, राजा गार्डन व जनकपुरी इलाके में सिख व पंजाबी समुदाय के लोग बहुतायत रहते हैं। अभी तक 1984 सिख दंगों से मिला घाव अभी भरा नहीं है। सिख समुदाय के लोग इसे खुलकर इजहार भी करते हैं। हालांकि, थोड़ी राहत बीते दिनों अदालत के उस फैसले से मिली है, जिसमें कुछ आरोपियों को सजा सुनाई गई है। इन कॉलोनियों का वोटर भाजपा व आम आदमी पार्टी (आप) के दावों व इरादों को परख रहा है।

मटियाला व द्वारका इलाके में बड़ी संख्या में पॉश कालोनियां हैं। इनमें रहने वाले ज्यादातर लोग बाहर से आकर बसे हैं। इनके लिए पेयजल व साफ-सफाई बड़ी समस्या है। नीतेश भारती का कहना है कि पानी की क्या कहें, यह तो सालों पुरानी समस्या है। पानी आदि दूसरी समस्याएं बाद में भी देखी जा सकती हैं। इस बार के चुनाव का बड़ा समला सुरक्षा ही होनी चाहिए।
 

पश्चिमी दिल्ली लोक सभा की विधानसभाएं

मादीपुर, राजौरी गार्डेन, हरि नगर, तिलक नगर, जनकपुरी, विकासपुरी, उत्तम नगर, द्वारका, मटियाला, नजफगढ़

राजनीतिक स्थिति
पहली बार पश्चिमी दिल्ली को अस्तित्व 2009 के चुनाव में मिला। 2009 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी महाबल मिश्रा ने जीत हासिल की थी। जबकि भाजपा प्रत्याशी जगदीश मुखी दूसरे व बसपा उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे थे। 2014 के चुनाव में भाजपा के प्रवेश वर्मा ने जीत हासिल की थी। आम अदमी पार्टी के जरनैल सिंह दूसरे व कांग्रेस के महाबल मिश्रा तीसरे स्थान पर रहे। इस बार के लोकसभा चुनाव में यहां पर भाजपा, कांग्रेस और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है।

पश्चिमी दिल्ली के तीन प्रत्याशी
प्रवेश वर्मा (41 वर्ष), भाजपा
मौजूदा सांसद प्रवेश वर्मा के पिता साहिब सिंह वर्मा भी भाजपा के कद्दावर नेता थे। साहिब सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री की गद्दी भी संभाली थी। प्रवेश वर्मा अपनी राजनीतिक विरासत का आगे बढ़ाते हुए दूसरी बार पश्चिमी दिल्ली का प्रतिनिधि बनने के लिए मैदान में हैं।

महाबल मिश्रा (66 वर्ष), कांग्रेस
महाबल मिश्रा को कांग्रेस का पूर्वांचली चेहरा माना जाता है। 2009 में वह सीट से सांसद रहे थे। इससे पहले तीन बार विधायक भी चुने गए हैं। हालांकि, 2014 में वह तीसरे स्थान पर थे, लेकिन इस बार उन्हें टक्कर का उम्मीदवार माना जा रहा है।

बलबीर जाखड़ (47 वर्ष), आप
बलबीर सिंह जाखड़ पहली बार अपना सियासी भविष्य तलाश रहे हैं। पेशे से वकील जाखड़ को आप ने सबसे आखिर में अपना प्रत्याशी घोषित किया था। जाखड़ द्वारका कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं। त्रिकोणीय मुकाबले में उन्हें मजबूत उम्मीदवार माना जात रहा है।

संसदीय सीट का जातीय गणित
ब्राह्मण 11.37 फीसदी
वैश्य 11.32 फीसदी
पंजाबी 15.18 फीसदी
अनुसूचित जाति 15.31
मुसलिम 4.71 फीसदी
जाट 8.80 फीसदी
गुज्जर 6.30 फीसदी
पूर्वांचल 11.30 फीसदी

2014 लोक सभा चुनाव का परिणाम
भाजपा 6,51,395
आप 3,82,809
कांग्रेस 1,93,266

मतदाताओं की संख्या
कुल मतदाता 23,67,509
पुरूष मतदाता 12,76,652
महिला मतदाता 10,90,797
ट्रांसजेंडर 60

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