फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Lok Sabha Elections 2019: Teachers face problem after the voting, Due to lack of facilities

मतदान के बाद हुआ शिक्षकों का ‘इम्तिहान’, कई बीमार, हवाई साबित हुए दावे

Tue, 14 May 2019 06:15 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली 
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली  Published by: देव कश्यप Updated Tue, 14 May 2019 06:15 AM IST
विज्ञापन
Lok Sabha Elections 2019: Teachers face problem after the voting, Due to lack of facilities
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ani

मतदान समाप्ति के बाद शिक्षकों को भी कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ा। चुनाव आयोग की अनदेखी और ध्वस्त व्यवस्थाओं के चलते वह रातभर सड़कों पर भटकने को मजबूर हो गए। बेबसी का आलम यह रहा कि वह 22 घंटे ड्यूटी के बाद भूखे-प्यासे अपने घरों तक पहुंचे। कई बीमार हो गए। कई का स्वास्थ्य गिर रहा है। बावजूद, सरकारी प्रवाह में होने के कारण वह अव्यवस्थाओं पर बोल तक नहीं पा रहे हैं।

विज्ञापन

दिल्ली में इस बार जहां उम्मीद से कम मतदान हुआ। वहीं, चुनाव आयोग की व्यवस्थाओं को लेकर ड्यूटी पर रहे शिक्षक नाराज हैं। सुबह करीब साढ़े तीन बजे से ड्यूटी पर रहने के बाद आधी रात को ये लोग भूख-प्यास से तड़प उठे। भोजन तो दूर, पेयजल तक नहीं मिला। पहचान छिपाने की शर्त पर एक शिक्षिका ने बताया कि शहरी इलाकों के बजाय उत्तर पश्चिम क्षेत्र में अधिक तकलीफ हुईं। 10 मई को थैला ले जाने के लिए उन्हें बुलाया गया था, लेकिन जब थैले मिले तो थोड़ी देर में वापस ले लिए गए। 11 मई को फिर से थैला लेकर जाने को कहा गया। इसके बाद मतदान के दिन यानि 12 मई की सुबह साढ़े तीन बजे उन्हें ड्यूटी पर बुलाया, जबकि ईवीएम मशीन की जिम्मेदारी उन्हें साढ़े चार बजे दी गई। ईवीएम जाम कराकर रात्रि 12 बजे खाली हुए। महिलाओं को भी घर तक भेजने की व्यवस्था तक नहीं थी।
विज्ञापन


वोटिंग कक्ष तक नहीं पहुंचाया पेयजल
शिक्षिका के मुताबिक, मतदान के दौरान सभी ड्यूटी कर्मचारियों को वोटिंग रूम में ही रहना पड़ता है। मतदान केंद्र पर पेयजल की व्यवस्था तो थी, परंतु कोई कर्मचारी बाहर जाकर पानी नहीं पी सकता था। ऐसे में वोटिंग रूम में कर्मचारियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए कोई नहीं था। इसके बाद रात को ईवीएम जमा कराने में भी दो से तीन घंटे मशक्कत करनी पड़ी। रात करीब 12 बजे जब वे स्ट्रांग रूम में ईवीएम जमा करके बाहर निकलीं तो उन्हें घर छोड़ने के लिए भी कोई सुविधा नहीं थी। रात करीब ढाई बजे वह घर पहुंचीं, जिसके चलते सोमवार को उनका स्वास्थ्य खराब हो गया। ठीक ऐसा ही हाल पश्चिमी दिल्ली क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर ड्यूटी देने वाले शिक्षकों का रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

लेना पड़ा ग्लूकोज का सहारा

एक शिक्षक ने बताया कि जो खाना उनके लिए बनवाया गया था उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं थी। बेहद गंदगी के साथ उसे बनाया गया था। दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र के बाहरी गांव में ड्यूटी देकर वापस घर लौटे एक शिक्षक ने बताया कि सोमवार को उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें अस्पताल में जाकर ग्लूकोज का सहारा लेना पड़ा।

भोजन के लिए सिर्फ 150 रुपये
शिक्षकों ने बताया कि आयोग मतदान के दिन उन्हें ड्यूटी के लिए 2 हजार रुपये पीठासीन अधिकारी और पोलिंग अफसर को 1500 रुपये का मेहनताना देता है। इसके अलावा 150 रुपये खाने के लिए दिए जाते हैं। इस राशि से जाहिर है कि सरकारी कर्मचारी किस हद तक प्रताड़ित होते हैं। 150 रुपये में अच्छा खाना नहीं मिल पाता है।

कितने बूथ-कितने कर्मचारी
चुनाव ड्यूटी में कुल पोलिंग ऑफिसर 51943 लगाए गए थे, जबकि पीठासीन अधिकारियों की संख्या 21002 थी। कुल बूथ 13819 थे, जिनमें लगभग 2000 बूथ बाहरी क्षेत्रों में थे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी-दिल्ली, डा. रणवीर सिंह ने बताया कि, यदि इस तरह की समस्या सामने आई तो ये बहुत गलत है। भविष्य में इस तरह की दिक्कतें न आएं इसके लिए वे व्यक्तिगत रूप से शिक्षकों से मिलेंगें। मतदान के दौरान सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी लगाने के बाद आयोग की पूरी जिम्मेदारी है कि उन्हें किसी भी तरह की तकलीफ न होने दी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed