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'अगर हम खुद को कोसते रहेंगे तो दुनिया हमारी ओर क्यों देखेगी'

Fri, 11 Mar 2016 10:51 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 11 Mar 2016 10:51 PM IST
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LIVE: Sri Sri's programs before the start of the crisis deepens clouds
महोत्सव को संबोधित करते पीएम मोदी

आर्ट ऑफ लिविंग की 35वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में तमाम विवादों के बीच मनाए जा रहे विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में पीएम मोदी शामिल हुए। उद्घाटन के दौरान महोत्सव की शुरुआत में 1050 विद्वानों ने वेद मंत्रों का पाठ किया।

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इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महोत्सव को संबोधित किया। पीएम ने संबोधन में कहा कि हमारा देश विविधताओं से भरा है और इसमें सम्पूर्ण विश्व को देने के लिए कुछ न कुछ जरूर है।
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पीएम के मताबिक दुनिया को मानवीय मूल्यों से जोड़ा जा सकता है। हमारे देश के पास वह सांस्कृतिक विरासत और अनुष्ठान हैं जिसकी आवश्यकता दुनिया को है। लेकिन हम इस आवश्यकता को तभी पूरा कर सकते हैं, जब हमें अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व हो और अभिमान हो। क्योंकि अगर हम खुद को कोसते रहेंगे तो दुनिया हमारी ओर क्यों देखेगी।
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पीएम के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय जगत में जहां राजशक्ति और राज सत्ता की पहुंच नहीं होती, वहां सॉफ्ट पावर का महत्व होता है। मोदी ने इस महोत्सव को कला का कुंभ बताया और कहा तन को डोलाने वाला संगीत तो बाजार में भरा पड़ा है लेकिन मन को डोलाने वाला संगीत भारत में ही है।

पीएम ने आर्ट ऑफ लिविंग को अलग-अलग संदर्भ में समझाते हुए कहा कि इसकी सबको जरूरत है। उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग की सराहना करते हुए कहा कि वे श्रीश्री रविशंकर का आभार व्यक्त करते हैं कि 35 सालों में एक छोटे से कार्यक्रम को उन्होंने 150 देशों तक पहुंचाया और लोगों को अपना बनाया।  अंत में पीएम ने सभी कलाकारों को भारत की विशेष छवि दुनिया भर में पहुंचाने के लिए धन्यवाद दिया।
 

श्रीश्री ने बताई बाधाओं की वजह

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World Culture Festival, Delhi

कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच महोत्सव को पहले श्रीश्री रविशंकर ने संबोधित किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों का स्वागत किया और फिर महोत्कसव के साथ जुड़े विवादों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अच्छा काम करने से पहले हमेशा ही बाधाएं आती है। इसलिए हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए और खुश रहना। कला और संस्कृति हमारे जीवन का अंग है।

श्रीश्री ने कहा कि कुछ लोग इस महोत्सव को पार्टी करार दे रहे थे, हां यह एक निजी पार्टी है क्योंकि पूरी दुनिया मेरा परिवार है। आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से तीन दिनों के लिए गान, ज्ञान, ध्यान एवं नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति के लिए विश्व का ये सबसे बड़ा मंच तैयार किया गया है। हालांकि महोत्सव पर शरुआत से पहले ही बादलों का संकट गहरा गया था।

कार्यक्रम के शुरु होने से पहले ही जहां एक ओर मौसम ने करवट ली तो वहीं दूसरी ओर लोगों को भीषण जाम से जूझना पड़ा। यमुना किनारे हो रहे इस बड़े सांस्कृतिक समारोह में एंट्री के लिए कुल 13 गेट बनाए गए हैं।

जिनमें से काले खां की ओर से 4 गेट, डीएनडी फ्लाई ओवर की ओर से 4 गेट और मयूर विहार की ओर से 5 गेट बनाए गए हैं। जिनकी ओर जाने के लिए लोगों को कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जबकि बारिश की बौछारें भी कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल पर देखने को मिली।

जानिए कैसे हैं कार्यक्रम के इंतजाम

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World Culture Festival, Delhi

महोत्सव के लिए सात एकड़ में मंच मनाया गया है। विश्व के सबसे बड़े मंच पर देश-विदेश के 35 हजार कलाकार अति आधुनिक तकनीक और अपने देशों की संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे।

आयोजकों ने मंच के ऊपर 11 गुमठ बनाए हैं और उसके दोनों ओर विश्व के करीब-करीब सभी देशों के झंडे लगाए गए हैं। इसके अलावा मंच के ऊपरी हिस्से में चार एलईडी लगाए गए हैं।यह एलईडी मंच के दोनों किनारों की ओर बैठने वाले दर्शकों को महोत्सव की प्रस्तुति दिखाने के लिए लगाए गए हैं। आयोजकों ने मंच के सामने वाले मैदान को 69 हिस्सों में बांटा है।

इन हिस्सों के बीच चारों ओर रास्ता छोड़ा गया है और दर्शकों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई हैं और दर्शकों को नजदीक से महोत्सव दिखाने के लिए 40 एलईडी लगाए हैं। महोत्सव में सुरक्षा की दृष्टि से कुछ हाईटेक उपकरण इस्तेमाल करने का दावा किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे एसपी सिन्हा का कहना है कि सभी प्रवेश द्वार पर कुछ मेटल डिटेक्टर लगाए जा रहे हैं जैसे प्रधानमंत्री कार्यालय और एयरपोर्ट में उपयोग किए जाते हैं।

सके अलावा पूरे आयोजन स्थल पर नजर रखने के लिए 170 सीसीटीवी लगाए गए हैं और सुरक्षाबलों की मदद के लिए पांच हजार स्वयंसेवक तैनात किए हैं इनको किसी भी आपदा से निपटने के लिए एनडीआरएफ से ट्रेनिंग दिलवाई गई है।

विवादों के बीच तैयार महोत्सव का मंच

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World Culture Festival, Delhi

इससे पहले आज श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग (एओएल) के कार्यक्रम पर लगे पांच करोड़ के जुर्माने पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में आज हुई सुनवाई में आखिरकार एओएल को राहत मिल गई।

आज शाम पांच बजे से शुरु होने वाले इस कार्यक्रम पर पिछले तीन दिन से मंडरा रहे संशय के बादल छट गए हैं। एओएल ने पांच करोड़ के जुर्माने की राशि में से 25 लाख की राशि आज जमा कर दी है। शेष 4.75 करोड़ की राशि को जमा करने के ‌लिए संस्‍था ने तीन हफ्ते का समय मांगा जिसे एनजीटी ने स्वीकार कर लिया है।

गौर करने वाली बात है कि एनजीटी ने ये भी स्वीकार कर लिया है कि एओएल जो राशि देगा उसे इस कार्यक्रम से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

इससे पहले एओएल ने एनजीटी को जवाब देते हुए कहा कि वह एक चैरिटेबल संस्‍था है जिसके लिए दो दिन के अंदर पांच करोड़ का इंतजाम करना आसान नहीं है।

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