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जिले के नेताओं की नजर 'हाथी' के साथ पर, सपा कुनबे की लड़ाई से लोगों में भ्रम
एसएस अवस्थी, अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 31 Aug 2018 04:17 AM IST
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लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है। एक तरफ सत्ता दल है तो दूसरी तरफ पूरा विपक्ष गठबंधन करके भाजपा से मुकाबले के लिए जुगत लगा रहा है। इसी क्रम में विपक्ष को मजबूत करने के लिए प्रदेश में सबसे ज्यादा टिकट दावेदारी की लाइन बसपा के दरबार में लग रही है। विशेषकर पार्टी सुप्रीमो मायावती के गृह जनपद गौतमबुद्धनगर में इसका सबसे ज्यादा असर दिख रहा है। पार्टी गठबंधन के संकेत दे चुकी है कि ऐसे में यह सीट उसी के खाते में जाएगी।
इससे सांसद बनने का सपना संजोए नेता मान बैठे हैं कि बहनजी का आशीर्वाद मिल गया तो जीत पक्की है। जीत मिली तो मंत्री भी बनना है। यही कारण है कि सपा हो, कांग्रेसी नेता हों या फिर भाजपा से रूठे नेता, वह चाहते हैं कि मौका उन्हें मिले।
यह हाल तब है जब पार्टी पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। हालांकि, बताया जा रहा है कि इनका टिकट कट सकता है। ऐसे में अगर सपा, बसपा, कांग्रेस व लोकदल का संयुक्त प्रत्याशी उतारा जाता है तो भाजपा के मौजूदा सांसद डॉ. महेश शर्मा मुश्किल में पड़ सकते हैं। ऐसे में नेताओं का लग रहा है कि अगर हाथी यानी बसपा का साथ मिल जाए तो किस्मत चमक सकती है, क्योंकि गौतमबुद्धनगर से जीत कुछ अलग ही मायने रखती है।
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इससे सांसद बनने का सपना संजोए नेता मान बैठे हैं कि बहनजी का आशीर्वाद मिल गया तो जीत पक्की है। जीत मिली तो मंत्री भी बनना है। यही कारण है कि सपा हो, कांग्रेसी नेता हों या फिर भाजपा से रूठे नेता, वह चाहते हैं कि मौका उन्हें मिले।
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यह हाल तब है जब पार्टी पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। हालांकि, बताया जा रहा है कि इनका टिकट कट सकता है। ऐसे में अगर सपा, बसपा, कांग्रेस व लोकदल का संयुक्त प्रत्याशी उतारा जाता है तो भाजपा के मौजूदा सांसद डॉ. महेश शर्मा मुश्किल में पड़ सकते हैं। ऐसे में नेताओं का लग रहा है कि अगर हाथी यानी बसपा का साथ मिल जाए तो किस्मत चमक सकती है, क्योंकि गौतमबुद्धनगर से जीत कुछ अलग ही मायने रखती है।
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मायावती के दरबार में हाजिरी
सूत्रों की माने तो इन दिनों बसपा सुप्रीमो मायावती के दरबार में हाजिरी लगाने वाले बढ़ते जा रहे हैं। उसमें बसपा के ही नहीं सपा, कांग्रेसी व रूठे हुए भाजपा नेता भी शामिल हैं। कई नेता तो ऐसे भी हैं जो पहले मुलाकात कर आए, लेकिन टिकट नहीं मांगी। अब दोबारा से जाने की तैयारी में हैं। वादा भी कर आए कि वह पार्टी की हर तरह से मदद करने को तैयार हैं।
पार्टी ने साफ कह दिया है कि काफी सोच समझकर ही प्रत्याशी घोषित किया है। कड़ी मेहनत की जा रही है। प्रदेश संगठन भी पूरा साथ दे रहा है। चुनाव की तेजी से तैयारी चल रही है। 2009 की तरह इस सीट पर 2019 में भी पार्टी जीतेगी।- विरेंद्र डाढ़ा, बसपा प्रत्याशी लोकसभा गौतमबुद्धनगर
फिलहाल, बसपा में एकजुटता दिख रही है। सपा में कुनबे की लड़ाई है। कांग्रेस हाशिए पर है। दूसरे दलों में जितनी उथल-पुथल मचेगी, उतनी ही बसपा की मांग बढ़ेगी। बसपा के लिए गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट काफी मायने रखती है।- डॉ. योगेंद्र सिंह, राजनीतिक जानकार
पार्टी ने साफ कह दिया है कि काफी सोच समझकर ही प्रत्याशी घोषित किया है। कड़ी मेहनत की जा रही है। प्रदेश संगठन भी पूरा साथ दे रहा है। चुनाव की तेजी से तैयारी चल रही है। 2009 की तरह इस सीट पर 2019 में भी पार्टी जीतेगी।- विरेंद्र डाढ़ा, बसपा प्रत्याशी लोकसभा गौतमबुद्धनगर
फिलहाल, बसपा में एकजुटता दिख रही है। सपा में कुनबे की लड़ाई है। कांग्रेस हाशिए पर है। दूसरे दलों में जितनी उथल-पुथल मचेगी, उतनी ही बसपा की मांग बढ़ेगी। बसपा के लिए गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट काफी मायने रखती है।- डॉ. योगेंद्र सिंह, राजनीतिक जानकार