'मुख्यमंत्री केजरीवाल ‘टॉक टू एके’ के नाम पर ‘मेरी बात सुनो’ चलाते दिखे'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश भाजपा ने कहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजनीतिक विस्तार के लिए दिल्ली की जनता के पैसों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ‘टॉक टू एके’ से भी साफ हो गया है कि वे दिल्ली की जनता के लिए नहीं, बल्कि पंजाब, गोवा और गुजरात के लिए इस कार्यक्रम में ज्यादा चिंतित दिखाई दिए।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा है कि मुख्यमंत्री ‘टॉक टू एके’ के नाम पर ‘मेरी बात सुनो’ चलाते दिखे। संवाद के नाम पर महज पांच प्रश्न चुने गए, जो सरकार के प्रचार का माध्यम बनें।
केजरीवाल ने जो प्रश्न चुने, उनमें से एक भी ऐसा नहीं था जो जनता का हो। क्योंकि जनता अपनी समस्याओं पर बात करती है न कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति, मंत्रियों के वेतन या केंद्र से टकराव पर।
12 बजकर 2 मिनट पर दिल्ली के एक मात्र प्रश्नकर्ता का पूरक प्रश्न लिया गया, जो तुगलकाबाद के संदीप माथुर थे। उन्होंने 2 माह से अटके एक विकास कार्य की सिफारिश रखी, तो मुख्यमंत्री उसे टाल गए।
आत्म प्रचार के लिए टॉक टू एके : विजेंद्र
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने ‘टॉक टू एके’ कार्यक्रम को आत्म प्रचार बताया है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली सरकार की विफलता और आप सरकार से जनता का मोहभंग होता देखकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह कार्यक्रम किया है।
करोड़ों रुपये फूंकने के बाद जब केजरीवाल को लगा कि दिल्ली की जनता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है, तो उन्होंने अपना प्रचार करने के लिए नाटक रचा। प्रचार के लिए किया गया खर्च अगर जलभराव को दूर करने पर किया गया होता, तो लोग परेशान नहीं होते।
यह कार्यक्रम जनता से सीधा संवाद न होकर पूरी तरह प्रायोजित था। जनता से सीधा संवाद का वादा किया गया था, लेकिन 48 मिनट तक सिर्फ केजरीवाल ही बोलते रहे। लोगों ने हजारों सवाल पूछे थे, लेकिन सिर्फ उन्हीं सवालों के जवाब दिए गए, जो सरकार के पक्ष में थे।
मुख्यमंत्री आवास पर धरना देंगे भाजपा नेता
वजीरपुर से रानीबाग जा रहे बच्चे अनस (9) पुत्र नौशाद की नाले में गिरकर हुई मौत के मामले में विजेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री आवास पर धरना देने का एलान किया है।
उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों को तीन दिन के अंदर न्याय नहीं दिया गया, तो वे अनस के माता-पिता के साथ धरना देंगे। मृतक के परिजनों ने कई बार मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं की लापरवाही के कारण वजीरपुर से रानीबाग जाने वाली सड़क संख्या 48 के समानांतर बह रहे गंदे नाले को ढकने के लिए नाले के ऊपर रखे जाने वाले स्लैब गायब थे। इसी कारण अनस नाले में गिरा।