केजरीवाल से पहले भी सरकारें कर चुकी हैं साइन
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिस लेटर ऑफ कंफर्ट (एलओसी) पर हस्ताक्षर करने वाली फाइल की बात कर रहे हैं यह कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी दिल्ली सरकार ने एलओसी पर अपनी सहमति दी थी और इसी आधार पर डिस्कॉम्स को बैंकों से लोन मिला था।
इस बार भी इसी प्रक्रिया के तहत लोन के लिए 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होने की वजह से दिल्ली सरकार से सहमति मांगी गई है। बिजली कंपनी ने सफाई देते हुए कहा है कि डिस्कॉम्स की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है इसलिए बिजली जेनरेशन कंपनियों सहित दिल्ली सरकार के बकाये राशि के भुगतान के लिए बैंक से लोन लेना है।
बिजली में दिल्ली सरकार और डिस्कॉम्स की हिस्सेदारी 49 और 51 प्रतिशत है। बैंक के नियमानुसार लोन के लिए एलओसी पर दोनों की सहमति जरूरी है।
इससे पहले भी लिया गया है लोन
कंपनी का यह भी कहना है कि एलओसी का निर्णय बीएसईएस की राजधानी या यमुना पावर लिमिटेड कंपनी का नहीं है बल्कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का है। इसमें नौ सदस्य होते हैं जिसमें चार सदस्य दिल्ली सरकार के होते हैं।
इससे पहले भी 2011 और 2014 में 1000 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था। इस बार 11000 करोड़ का लोन लेना है क्योंकि कंपनियों और सरकार के बकाये राशि का भुगतान करना है। ऐसा न होने पर बिजली की किल्लत हो सकती है।
कंपनी का कहना है कि एलओसी का राजनीतिकरण कर दिया गया। जबकि डिस्कॉम्स ने पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन से लेने वाले लोन के लिए शर्तों में इस बात को भी शामिल किया है कि यदि डिस्कॉम्स रकम चुकाने में असफल रहता है तो कंपनी की 51 फीसदी हिस्सेदारी जब्त हो सकती है।