कूड़े पर सफाई के लिए केजरीवाल ने किए लाखों खर्च
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एक ओर जहां नगर निगम के सफाईकर्मचारियों की हड़ताल के कारण पूरी दिल्ली गंदगी से पटी पड़ी है, वहीं सीएम केजरीवाल ने आज अखबारों में विज्ञापन देकर इस स्थिति पर सफाई दी है।
केजरीवाल ने विज्ञापन के माध्यम से ये सफाई देने की कोशिश की है कि हड़ताल के बारे में कुछ गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नगर निगम दिल्ली सरकार के अधीन नहीं आते।
हालांकि इस विज्ञापन में ये स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली सरकार को भी नगर निगमों को खर्च के लिए कुछ पैसे देने होते हैं। बताया गया है कि कानून में भी ये बात साफ है कि सरकार को निगमों को कितने पैसे देने हैं, लेकिन जनता के बीच गलतफहमी फैलाई जा रही है।
विज्ञापन में ये भी बताया गया है कि इस वर्ष अक्टूबर तक पिछले साल से कहीं अधिक पैसे दिए जा चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर तक 1859 करोड़ रुपए दिए गए थे जबकि इस साल अक्टूबर तक 2370 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। यानी 511 करोड़ रुपए ज्यादा दिए गए हैं।
सैलरी न मिलने पर नहीं है ये हड़ताल
अपने विज्ञापन में दिल्ली सरकार ने ने सफाईकर्मचारियों की हड़ताल के कारण गंदी हो चुकी दिल्ली का एक बड़ा कारण डीडीए को भी बताया है। केजरीवाल ने बताया है कि डीडीए को 1500 करोड़ रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स लेना है।
इस विज्ञापन में बताया गया है कि डीडीए और नगर निगम दोनों ही केंद्र के अधीन हैं। उन्होंने निवेदन किया है कि डीडीए से नगर निगम को तुरंत पैसा दिलाया जाए।
इसके साथ ही विज्ञापन में यह बात स्पष्ट की गई है कि सफाईकर्मचारियों को सितंबर तक का वेतन दे दिया गया है और यह हड़ताल वेतन के लिए नहीं की गई है।
इस विज्ञापन के माध्यम से केजरीवाल सरकार ने स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि यह हड़ताल कर्मचारियों को नियमित करने, उनके 10-15 साल पुराने बकाया चुकाने एवं अन्य मांगों को लेकर है।
सरकार ने तीनों निगमों के मेयर से अपील की है कि सफाईकर्मचारियों की मांगें मान लें और साथ ही सफाईकर्मचारियों से भी अपील की गई है कि हड़ताल वापस ले लें क्योंकि जनता को काफी तकलीफ हो रही है।