गलती से गई जान, मिलेगा पचास लाख का मुआवजा
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गौरतलब है कि इसी साल जुलाई में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार को करन के परिवार को पांच लाख रूपए देने का आदेश दिया था। सरकार ने आयोग के इस फैसले के तीन महीने बाद मुआवजे की इस रकम को दस गुना बढ़ा कर देने का फैसला किया है। घटना के करीब डेढ़ साल बाद दिल्ली सरकार ने करन के परिवार को 50 लाख रुपए देगी।
दरअसल, पिछले साल 28-29 जुलाई की मध्यरात्रि में दिल्ली के वीआईपी इलाके अशोक रोड पर कुछ बाइकर स्टंट कर रहे थे। जब पुलिस ने इन्हें ऐसा करने से रोका तो उन्होंने पथराव करना शुरू कर दिया।
इस दौरान ही करन भी इनके बीच आ गया था। बाइकर्स को रोकने के लिए पुलिस ने गोली चलाई जो करन की बाइक के टायर में लगी। बाइक से गिरने की वजह से करन की मौत हो गई।
हांलाकि, घटना के बाद पुलिस का कहना था कि करन भी उन बाइकर के साथ था जिन्हें पुलिस काबू करना चाह रही थी। बाइकर दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में इस स्टंट कर उत्पात मचा रहे थे। जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो बाइकर्स ने पुलिस पर पत्थरों से हमला कर दिया। जवाब में पुलिस ने फायरिंग कर दी।
टायर में गोली लगने से हुई मौत
बाइकर्स और पुलिस से झड़प के बीच ही अपने दोस्त के साथ बाइक पर सवार करन भी भीड़ में आ गया। अचानक पुलिस की गोली करन की बाइक के टायर में लगी। बाइक पर पीछे बैठा करन नीचे जा गिरा और उसकी मौत हो गई।
करन के घरवालों का कहना था कि उसका उत्पाती बाइकर से कोई लेना देना नहीं था। असल में वह ऑफिस से घर वापस आ रहा था। मामले की सुनवाई राष्ट्रीय मानवाधिकार में हुई।
आयोग ने पुलिस की लापरवाही पर सख्त रूख अपनाते हुए सरकार को इस लापरवाही के बदले करन के परिवार को मुआवजे के तौर पर पांच लाख रुपए देने का आदेश दिया।
इससे पहले कि परिवार को मुआवजे की राशि मिलती उनके लिए एक राहत की खबर आ गई। नौ अक्टूबर को राज्यपाल नजीब जंग ने घोषणा की कि करन के परिवार को आयोग द्वारा निर्देशित राशि से दस गुना ज्यादा दिया जाएगा।
इसके साथ ही एलजी ने पुलिस कमश्निर बीएस बस्सी को कहा कि घटना में शामिल पुलिस वालों पर कार्यवाई का भी निर्देश दिया।
खुले में नहीं चला सकती पुलिस गोली
गौरतलब है कि एनएचआरसी ने भी इस घटना में शामिल पुलिस इंस्पेक्टर पर लारपरवाही के तहत कारवाई की बात कही थी। एनएचआरसी का कहना था कि पुलिस को खुले में गोली चलाने की कोई जरूरत नहीं थी।
एनएचआरसी के संज्ञान में आने के बाद पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालाकृण्णन ने चीफ सेक्रेटरी को मामले की जांच करने और पुलिसवालों पर कार्यवाई के निर्देश दिए साथ ही छह सप्ताह में मुआवजे की रकम देने को कहा था।
एनएचआरसी ने कहा कि सरकार की यह पहल सराहनीय है क्योंकि इसमें सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने की जगह उसे स्वीकार किया है।
रविवार को ही बदमाशों की गोली से मारे गये पुलिस कर्मी जसबीर सिंह के परिवार को भी एक करोड़ रूपए देने का ऐलान किया गया। जसबीर के परिवार को एक करोड़ दिए जाने की मांग सबसे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने की थी।