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देवभूमि की धड़कन और यमुना की गोद में बसा 'कलसी'
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 05 Mar 2014 12:00 PM IST
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यमुना और टोंस नदी के संगम पर देवभूमि, उत्तराखंड के देहरादून जिले में समुद्र स्तर से 780 मीटर ऊपर एक छोटा सा गांव है कलसी। जौनसार-बावर जनजातिय क्षेत्र के प्रवेश द्वार के रूप में कलसी, यमुनोत्री जाने वाले पुराने मार्ग पर पड़ता है। यहां आपको यमुना की वो स्वच्छता देखने को मिलेगी जो दिल्ली के प्रदूषित और नाला बन चुकी यमुना में कभी नहीं देखा होगा। उत्तरांचल और हिमाचल की विशाल पहाड़ियों और पठारों के बीच में चुपचाप बैठी कलसी अपनी भव्य सुंदरता के साथ राहगीरों को आकर्षित करती है।
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सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
जौनसार और बावर आदिवासी बेल्ट के रूप में विख्यात कलसी इनकी सांस्कृतिक विरासत अपने में समेटे है। इस तरह कलसी ना केवल घूमने के लिए बल्कि आदिवासी लोगों पर रिसर्च करने वालों, गांव और मानव कहानियों पर काम करने वालों के लिए भी अहम है। यहां मुंदर, खील और भूटी जनजाति के लोग अपने लोक नृत्य, त्योहार और सांस्कृतिक विरासत के साथ रहते हैं।
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कलसी में सम्राट अशोक द्वारा प्राकृत और ब्राह्मी लिपि में बनवाया शिलालेख तो आप बिल्कुल भी मिस नहीं करना चाहेंगे। नाशपाती के शेप का ये क्वार्ट्ज रॉक 10 फीट लंबा, 8 फुट चौड़ा और 10 फुट ऊंचा है जिस पर एक हाथी भी बना है। यह शिलालेख परस्पर प्यार, भाईचारे, मैत्री और शांति का संदेश देता है।
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क्यों जाएं
अगर आप हरियाली की गोद अपना वीकेंड सुकून से बिताना चाहते हैं तो कलसी आपके लिए मुफीद जगह है। यमुना की तलहटियों में स्थित कलसी में आप साइक्लिंग, फिशिंग, ट्रैकिंग कर सकते हैं। सिल्वर ओक और साल के जंगलों से घिरे रास्तों पर साइक्लिंग का जो आनंद है वो और कहीं नहीं है।
कब आएं और कहां रहें
कलसी की ठंड सर्दियां और हल्की गर्मी सालभर पर्यटकों को अपनी ओर बुलाती है। फिर भी यहां आने का सबसे अच्छा समय सितंबर से लेकर अप्रैल तक है। कलसी में रहने के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा चलाया जा रहा टूरिस्ट कॉम्प्लैक्स या या स्नो लॉयन इस्टेट आपके पास दो ऑप्शन हैं। टूरिस्ट कॉम्प्लैक्स में आपको कई तरह के वाटर स्पोर्ट्स और ट्री गार्डन भी है जिनका मजा आप ले सकते हैं।
कैसे पहुंचे
हवाई यात्राः देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से कलसी की दूरी 68.6 किमी है। यहां से आप टैक्सी या कार हायर कर सकते हैं।
रेल यात्राः देहरादून का गोविंद नगर रेलवे स्टेशन कलसी से 43.5 किमी की दूरी पर है। यहां से आप सिटी बस, कार या टैक्सी कुछ भी ले सकते हैं।
रोड यात्राः देहरादून ISBT जो कलसी से 45.5 किमी दूर है तक पहुंचकर आसानी से कलसी जाया जा सकता है। यहां से आप अगर टैक्सी या कार हायर करेंगे तो आप जल्दी और सुविधाजनक तरीके से कलसी पहुंच सकते हैं। अगर आप दिल्ली से अपनी कार से जाना चाहते हैं तो दिल्ली-पानीपत-करनाल-पिपली-लाडवा-यमुनानगर-जगधरी-बाटा पुल-पूंटा साहिब-हरबतपुर-विकासनगर होते हुए कलसी पहुंच सकते हैं।
कलसी और आसपास
विकासनगरः कलसी से 10 किमी की दूरी पर बसा ये उत्तराखंड का सबसे तेजी से विकास करता हुआ शहर है जो अब भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए हुए है।
असान बैरेजः पुंटा साहिब की ओर ले जाने वाली रोड पर इंजीनियरिंग के बेहतरीन नमूने के रूप में टोन नदी पर बना असान बैरेज आपको सम्मोहित कर लेगा। कलसी जाने पर इसे ना देखा जाए तो सफर अधूरा ही रह जाएगा।
डाकपत्थरः नवीनता का अग्रदूत कहे जाने वाला डाकपत्थर पनबिजली बैरेज यमुना नदी पर बना है। ये बर्डवाचर्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है क्योंकि यहां पक्षियों की लुप्तप्राय प्रजातियां भी देखी जा सकती हैं।
पुंटा साहिबः पुंटा साहिब वो जगह है जहां सिखों के दसवें गुरू, गुरू गोविंद सिंह को उनके पिता गुरू तेग बहादुर सिंह बलिदान के बाद भेजा गया था। यहां वो लंबे समय तक रहे। यहां कई गुरुद्वारे भी हैं।
तिमली पासः असान बैरेज से कलसी वापस जाते हुए तिमली पास रास्ते में पड़ता है जिसे अंग्रेज सैनिकों ने गुर्खा जनरल अमर सिंह की सेना के खिलाफ दून घाटी को कब्जे में करने के लिए इस्तेमाल किया था।