जुनैद हत्याकांड: दो और आरोपियों को जमानत मिली, परिजनों ने पुलिस पर लगाए ये आरोप
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फरीदाबाद के बहुचर्चित जुनैद हत्याकांड में बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वाईएस राठौर की अदालत ने प्रदीप और गौरव को जमानत दे दी। इससे पहले 29 जुलाई को एक अन्य आरोपी चंद्र प्रकाश उर्फ चंदर को भी जमानत मिल गई थी।
बचाव पक्ष की दलील थी कि 22 जून की शाम दिल्ली-पलवल ईएमयू के जिस डिब्बे में वारदात हुई उसमें 60-70 अन्य यात्री भी थे। जीआरपी ने तफ्तीश में उन सभी लोगों से पूछताछ की। इनमें से किसी भी यात्री ने यह बयान नहीं दिया कि चाकूबाजी और झगड़े में नरेश के अलावा कोई दूसरा आरोपी शामिल था।
इस तथ्य के आधार पर बचाव पक्ष के वकील ने प्रदीप और गौरव की गिरफ्तारी को अनुचित ठहराते हुए जमानत मांगी। इस पर कोर्ट ने जीआरपी से जवाब तलब किया। जीआरपी के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा लेकिन वह अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके। इसलिए कोर्ट ने आरोपी की जमानत मंजूर कर ली।
वहीं, परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जांच में जानबूझ कर महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की, जिसकी वजह से आरोपियों को अदालत में आसानी से जमानत मिल गई।
ये है पूरा मामला?
22 जून को जुनैद अपने तीनों भाई हाशिम, मोहसिन और मोइन के साथ ईद की खरीदारी कर दिल्ली से लौट रहा था। सदर बाजार स्टेशन से वे लोग ईएमयू में सवार हुए। उस समय सीटें खाली थीं तो वे लूडो खेलने लगे। कुछ देर में ईएमयू भर गई। इस बीच एक बुजुर्ग व्यक्ति आया और जुनैद से बाला ‘बेटा सीट दे दो’। इतना सुनकर जुनैद उठ गया और बुजुर्ग को अपनी सीट दे दी।
हाशिम ने बताया ओखला स्टेशन पर 20-25 लोग ईएमयू में सवार हुए और धक्का-मुक्की करने लगे। इन लोगों ने जुनैद को जोर से धक्का दिया, जिसका मैंने विरोध किया तो एक हमारे साथ बदसलूकी शुरू हो गई। कोई हम पर जातिगत टिप्पणी कर रहा था तो कोई बीफ खाने वाला बता रहा था। इस बीच वो बुजुर्ग व्यक्ति उठा जिसे हमने सीट दी थी और जुनैद को थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद 10-15 अन्य लोगों ने हमारे साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोपियों ने जुनैद और उसके भाइयों पर चाकू से हमला किया।