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जेएनयू में 17 दिन बाद भूख हड़ताल खत्म: पांच छात्र नेताओं का निष्कासन रद्द, केस और जांच वापस लेने पर भी सहमति

Tue, 20 Oct 2026 06:57 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Tue, 20 Oct 2026 06:57 PM IST
सार

छात्रसंघ की आपत्ति के बाद चीफ प्रॉक्टर कार्यालय (सीपीओ) के नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित होगी। इसमें जेएनयू छात्रसंघ का एक पदाधिकारी और एक निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे, जो विवादित प्रावधानों को हटाने की सिफारिश करेगी।

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jnu students hunger strike ends five student leaders expulsion revoked fir inquiry
जेएनयू में 17 दिन बाद भूख हड़ताल खत्म - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में 17 दिन से चल रही छात्र संघ की भूख हड़ताल समाप्त हो गई है। प्रशासन ने छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने पर सहमति जताई है। पांच छात्र संघ पदाधिकारियों का निष्कासन भी तत्काल प्रभाव से रद कर दिया गया है।

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किन-किन का हुआ निष्कासन रद्द
छात्र प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। निष्कासन रद्द किए गए छात्रों में अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के. गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने इन छात्रों को अपने जुर्माने की राशि तत्काल जमा करने की सलाह दी है। इन छात्रों को पिछले वर्ष नवंबर की 21 तारीख को डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में तोड़फोड़ के मामले में निष्कासित किया गया था। बायोमीट्रिक फेस रिकॉग्नाइजेशन सिस्टम की मशीनें उखाड़ने का आरोप भी था। यह कार्रवाई फरवरी महीने में की गई थी। प्रशासन ने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान शुरू की गई प्रॉक्टोरियल जांच भी वापस लेने का फैसला किया है। इन जांचों में निष्कासन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के खिलाफ प्रदर्शन शामिल थे।

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छात्र मांगों पर विचार के लिए समितियां
छात्रसंघ की आपत्ति के बाद चीफ प्रॉक्टर कार्यालय (सीपीओ) के नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित होगी। इसमें जेएनयू छात्रसंघ का एक पदाधिकारी और एक निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे, जो विवादित प्रावधानों को हटाने की सिफारिश करेगी। जेएनयू प्रवेश परीक्षा की समीक्षा के लिए भी छात्रसंघ के प्रतिनिधि वाली समिति बनाई जाएगी। समान अवसर प्रकोष्ठ (ईओसी) की ऑडिट रिपोर्ट एक सप्ताह में उपलब्ध कराई जाएगी और छात्रसंघ पदाधिकारियों से परामर्श कर इसका पुनर्गठन भी होगा।

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छात्रावास सुविधाओं और छात्रवृत्ति में सुधार
प्रशासन ने मेरिट-कम-मीन्स (एमसीएम) छात्रवृत्ति में 25 फीसदी बढ़ोतरी पर विचार करने की सहमति दी है। ताप्ती और माही-मांडवी छात्रावासों के साथ ट्रांसजेंडर एवं जेंडर इक्वैलिटी फैसिलिटेशन एरिया का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाएगा, जिसके बाद मरम्मत कार्य होगा। सभी छात्रावासों में दो सप्ताह के भीतर गीजर चालू करने का निर्णय लिया गया है।

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