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चांद पर आता है भूकंप, यकीन न हो तो देख लीजिए

Sat, 30 May 2015 04:39 PM IST
Updated Sat, 30 May 2015 04:39 PM IST
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JNU's historic invention, NASA has failed in it.

पृथ्वी की तर्ज पर चंद्रमा में भी भूकंप आते हैं। चंद्रयान -एक 2008 के डाटा से इसरो व जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के भू-वैज्ञानिकों को 22 मई 2015 को बड़ी सफलता मिली है।

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क्योंकि भू -वैज्ञानिकों के चार साल के शोध को इंग्लैंड के प्लेनेटरी एंड स्पेस साइंस के जरनल ने भी सलाम करते हुए माना कि जो सफलता नासा को नहीं मिल सकी, उसे भारतीय संस्थान व वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है।
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यह चंद्रमा से जुड़ी जानकारियों की सबसे बड़ी उपलब्धि है। खास बात यह है कि भूकंप के झटकों के चलते ही चांद का एक हिस्सा कुछ ऊपर उठा हुआ है, बीस किलोमीटर लंबी चट्टान में पत्थर भी इकट्ठे पड़े हैं।
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चांद में आया अहम बदलाव

JNU's historic invention, NASA has failed in it.

वहीं, यह भी पता चला है कि आक्सीजन व पानी की कमी के चलते जीवन की संभावना कम है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंवायरमेंटल साइंस के भू-वैज्ञानिकों को इसरो ने चंद्रयान से आने वाले डाटा का अध्ययन करने का जिम्मा वर्ष 2010  में सौंपा था।

भू- वैज्ञानिक व जेएनयू के प्रोफेसर सौमित्र मुखर्जी के मुताबिक, वर्ष 2008 में इसरो का चंद्रयान चंद्रमा के लिए रवाना हुआ था। उसके बाद वर्ष 2010 में सेटेलाइट के माध्यम से डाटा आना शुरू हुआ।

वर्ष 2010 से लेकर 2014 तक चंद्रमा से मिलने वाले डेटा के आंकड़ों और फोटो के माध्यम से अध्ययन चला। इसकी पूरी रिपोर्ट 22 मई 2015 में जाकर तैयार हुई। उसी के आधार पर आगे इंग्लैंड के जरनल प्लेनेटरी एंड स्पेस साइंस ने मान्यता दी है।

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