जाह्नवी ने खोला राजधानी का एक और सच
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दिल्ली के जहांगीरपुरी के राजकुमार हो या फिर संगम विहार के मोहन। राजधानी में ऐसे परिवारों की तादाद अच्छी खासी है जहां परिजनों की आंखें हर वक्त अपने खोए हुए बच्चों की तलाश करती रहती हैं। उन्हें विश्वास है कि एक न एक दिन उनका खोया बेटा या फिर उनकी लाडली उन्हें मिल जाएगी।
अपने बच्चों की तलाश में वह थाने जाते हैं, लेकिन वहां पुलिसकर्मी उन्हें बच्चे की खोज जारी रहने बात कहकर थाने से विदा कर देते हैं। ऐसे परिवारों के लिए इंडिया गेट से गायब हुई जाह्नवी का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं।
आंकड़ों के मुताबिक राजधानी रोजाना 18 बच्चे गायब होते हैं। अकेले वर्ष 2014 में ही अब तक 6,459 बच्चे गायब हो चुके हैं। जिनमें बच्चियों की संख्या करीब 45 फीसदी है। वहीं वर्ष 2008 से लेकर अब तक राजधानी से 41,358 बच्चों की गुमशुदगी दर्ज हो चुकी है। जिसमें से पुलिस ने 22,747 बच्चों को बरामद कर लिया।
भीख मांगते हुए मिली बच्ची
दिल्ली में अब भी 18,611 बच्चे लापता हैं। जिसमें से करीब 40 फीसदी संख्या बच्चियों की बताई जाती है। पुलिस अधिकारी भी मानते हैं कि बच्चों के गायब होने के पीछे मानव तस्करी एक बड़ी वजह हो सकती है। वहीं राजधानी में कई ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो बच्चों की चोरी कर उन्हें भीख मंगवाने का काम करते हैं।
गत वर्ष दिसंबर माह में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था। खजूरी खास पुलिस ने दो साल पूर्र्व 12 साल की बच्ची और उसके भाई के गायब होने के मामले की जांच करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार युवकों ने खुलासा किया कि दोनों को भीख मंगवाने के लिए अगवा किया गया था।
बच्ची शाहदरा इलाके में भीख मांगते हुए मिली थी, वहीं उसके छोटे भाई को महिला गोद में लेकर विजय नगर गाजियाबाद में भीख मांग रही थी। दिल्ली पुलिस ने ऐसे कई गिरोह की महिला सदस्यों को गिरफ्तार किया है जो बच्चों को चोरी करने के बाद उन्हें लाखों रुपये में बेच देते हैं। पुलिस की मानें तो कई मामलों में नाबालिग बच्चियों को अगवा कर उन्हें देह व्यापार में धकेल दिया जाता है।
ऑपरेशन खोज से हो रही छानबीन
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग राजधानी से गायब हुए बच्चों की छानबीन के लिए ऑपरेशन खोज अभियान चला रहा है। जिसके तहत आयोग गायब हुए बच्चों का पूरा ब्योरा तैयार करने में जुटा है। जिसे दिल्ली स्थित सभी 102 चिल्ड्रेन होम को भेजा जाएगा।
आयोग के अध्यक्ष अरुण माथुर ने बताया कि दिल्ली में करीब सात हजार बच्चे गायब होते हैं। आयोग गायब हुए सभी बच्चों का ब्योरा तैयार कर उसका ब्योरा ईमेल missingchild.dcpcr@gmail.com के जरिये चिल्ड्रेन होम को भेजेगी। जब कोई गायब बच्चा चिल्ड्रेन होम पहुंचेगा तब वहां के कर्मचारी गायब हुए बच्चों की जानकारी पहले से होगी।
अस्पतालों के आसपास मौजूद रहता है गिरोह
अस्पतालों के आसपास भी बच्चों को चुराने वाले सक्रिय रहते हैं। सफदरजंग अस्पताल में वर्ष 2012 में इलाज कराने आए अदन सिंह की पांच वर्षीय बच्ची गायब हो गई। बाद में सीसीटीवी कैमरे में एक शख्स को बच्ची को उठाकर ले जाते हुए देखा गया। लेकिन उसका आज तक कोई पता नहीं चल पाया। उसी साल राममनोहर लोहिया अस्पताल से पांच साल की बच्चा को अगवा कर लिया गया।
जिसे स्पेशल सेल ने एक महिला को गिरफ्तार कर बरामद कर लिया। पूछताछ में महिलाओं ने उसे एक लाख में बेचे जाने की बात स्वीकार कर ली। वहीं वर्ष 2013 में पश्चिम दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल से सात माह की बच्ची और मोती नगर स्थित ईएसआई अस्पताल से पांच साल के बच्चे की चोरी का मामला सामने आया था।