ईको फ्रेंडली नवरात्र मना रहा झंडेवालान मंदिर: सजावट से प्रसाद तक ऑर्गेनिक वस्तुओं का हो रहा इस्तेमाल
झंडेवालान मंदिर के न्यासी रवींद्र गोयल ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्ष तक मंदिर में नवरात्रों में बेहद सीमित पूजा-पाठ हुआ। लेकिन कोरोना खत्म हो जाने के कारण इस बार भक्त पूरे उत्साह के साथ मंदिर दर्शन के लिए आ रहे हैं। झंडेवालान मंदिर में प्रतिदिन आने वाले भक्तों की संख्या 60 से 70 हजार के बीच बनी हुई है...
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पूरी दुनिया में पर्यावरण के प्रति बढ़ रहे खतरे को देखते हुए आस्था के केंद्र मंदिर भी इसके प्रति संवेदनशील हो गए हैं। झंडेवालान मंदिर इस बार पूरी तरह ‘ईको फ्रेंडली’ नवरात्र मना रहा है। मंदिर की सजावट से लेकर भक्तों को दिए जाने वाले प्रसाद तक में प्लास्टिक जैसी पर्यवारण के लिए खतरनाक चीजों का इस्तेमाल रोक दिया गया है। मंदिर परिसर में मिलने वाली वस्तुओं को भी पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल रखने की कोशिश की गई है।
पूरे मंदिर परिसर को देसी-विदेशी फूलों से सजाया गया है। प्रवेश द्वार से लेकर मंदिर के गर्भगृह तक मंदिर को पूरी भव्यता के साथ सजाया गया है। मंदिर परिसर में नौ देवियों की विशेष प्रतिमाएं दिखाई गई हैं, तो मास्क पहनने के लिए जागरूकता फैलाने वाली मूर्तियां भी बनाई गई हैं। सामान्य तौर पर मंदिर में भक्तों को बैठाकर प्रसाद दिया जाता था, लेकिन कोरोना काल आने के बाद पैकेट बंद प्रसाद भक्तों को दिया जाने लगा है। यह सिस्टम इस बार भी जारी रखा गया है।
इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर प्लास्टिक जैसी वस्तुओं का उपयोग नहीं किया गया है और पूरे परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखने की कोशिश की गई है। भक्तों को दिया जाने वाला प्रसाद भी फूड पैकेट और लकड़ी के चम्मच के साथ दिया जा रहा है।
न्यासी ने बताया, पूरे उत्साह के साथ मंदिर दर्शन के लिए आ रहे भक्त
झंडेवालान मंदिर के न्यासी रवींद्र गोयल ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्ष तक मंदिर में नवरात्रों में बेहद सीमित पूजा-पाठ हुआ। लेकिन कोरोना खत्म हो जाने के कारण इस बार भक्त पूरे उत्साह के साथ मंदिर दर्शन के लिए आ रहे हैं। झंडेवालान मंदिर में प्रतिदिन आने वाले भक्तों की संख्या 60 से 70 हजार के बीच बनी हुई है। अनुमान है कि शनिवार और रविवार को ज्यादा संख्या में भक्त देवी के दर्शन के लिए मंदिर आ सकते हैं।
एप से बुक करें दर्शन का समय
झंडेवालान मंदिर दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की विशेष सुविधा के लिए इस बार क्यूआर कोड सिस्टम विकसित किया गया है। मंदिर की वेबसाइट पर या एप से क्यूआर कोड प्राप्त किया जा सकता है और एक क्यूआर कोड से चार लोगों को सीधे मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। इससे दर्शन के लिए भक्तों को ज्यादा समय तक लाइन में नहीं लगना पड़ रहा है। मंदिर प्रशासकों का कहना है कि इससे पार्किंग की बड़ी समस्या को भी सुचारू बनाने में मदद मिली है।
मंदिर में सामान्य भक्तों के लिए गेट नंबर एक पर सिंह द्वार से प्रवेश दिया जा रहा है। क्यूआर कोड लेकर आने वाले भक्तों के लिए गेट नंबर दो गरूड़ द्वार से और मंदिर को विशेष सहयोग देने वाले भक्तों के लिए गेट नंबर तीन मयूर द्वार से प्रवेश दिया जा रहा है।
2200 पुरुष और 300 महिला सेवादारों के साथ कुल 2500 सेवादार मंदिर प्रशासन का कामकाज सामान्य बनाने में मदद कर रहे हैं। महिलाओं के लिए रोज सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक मुफ्त मेंहदी लगाने के लिए व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन लगभग दो हजार महिलाएं मेहंदी भी लगवा रही हैं।