जनता कर्फ्यू के बीच छलका रिक्शेवाले का दर्द- 'न कोई सवारी आई, न खाने को कुछ मिला, सुबह से भूखा बैठा हूं'
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कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से लड़ने के इरादे से रविवार को जनता कर्फ्यू मनाने के फैसले का पूरा देश समर्थन कर रहा है। सभी ने यथा संभव खुद को घरों में बंद रखा है, सोसायटियों के मुख्य दरवाजे बंद हैं, रेस्त्रां से लेकर दुकानें और बाजार भी बंद हैं। सड़कें सुनसान पड़ी हुई हैं और खचाखच जाम झेलने वाले रास्तों पर आज समय-समय पर इक्का-दुक्का वाहन गुजरते नजर आ रहे हैं।
जनता कर्फ्यू के इस तरह सफल होने से लोगों को एक साथ मिलकर कोरोना वायरस से लड़ने की हिम्मत जरूर मिली है, लेकिन इसका हमारे देश के एक वर्ग पर ऐसा असर भी पड़ रहा है जिसे जानकर कोई भी भावुक हो जाए। एक तरफ लोग आज के जनता कर्फ्यू को कैरम खेल कर, परिवार के साथ समय बिताकर या आराम कर के बिता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमर उजाला की नजर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जिसे जनता कर्फ्यू के कारण आज सुबह से खाना तक नसीब नहीं हो पाया है।
दिल्ली में रिक्शा चला कर परिवार का पेट पालने वाले एक व्यक्ति ने अमर उजाला के साथ जनता कर्फ्यू के दौरान अपने दर्द को साझा किया। आज जनता कर्फ्यू के कारण उन्हें रिक्शे के लिए कोई सवारी नहीं मिली। इससे न केवल उनके रिक्शे का पहिया, बल्कि उनकी पूरी दुनिया ही थम गई है।
रिक्शाचालक बताते हैं कि वो सुबह से किसी सवारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अबतक एक भी सवारी नहीं मिली। वो आज एक रुपया भी नहीं कमा पाए हैं। दिन चढ़ने के साथ जब उन्हें भूख लगी तो वे खाने की तलाश में निकले, लेकिन उनके इलाके में सुबह से ही सारी दुकानें बंद थीं।
बहुत खोजने पर भी उन्हें खाना नहीं मिल सका। यह रिक्शा चालक समाज के उस वर्ग से आते हैं जो रोज कुआं खोदकर पानी पीते हैं, यानी उन्हें रोज पेट भरने के लिए रोज कमाना पड़ता है। अब एक दिन के लिए ही सही, लेकिन सबकुछ इस तरह थम जाने से उनके सामने बड़ी समस्या आ खड़ी हुई है।
मालूम हो कि कोरोना वायरस के चेन को तोड़कर उसके संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने आज जनता कर्फ्यू लागू कर लोगों से अपने घरों में ही बंद रहने की अपील की थी। आज देश भर में इसका व्यापक असर देखने को मिला।
केवल दिल्ली की ही बात करें तो हमेशा भीड़-भाड़ और पर्यटकों से गुलजार रहने वाले कनॉट प्लेस से लेकर लाल किला, जामा मस्जिद, सरोजिनी नगर मार्केट, लक्ष्मी नगर समेत सभी इलाके सुनसान पड़े हुए हैं। एक गाड़ी के गुजरने की आवाज भी दूर तक गूंज रही है, लेकिन इस रिक्शेवाले का दर्द सुनकर भी कोई हल नहीं निकल रहा।