फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   jamia firing: minor can be save Due to this strict law made after Nirbhaya

निर्भया के बाद बने इस सख्त कानून की वजह से बच सकता है जामिया में गोली चलाने वाला नाबालिग

Fri, 31 Jan 2020 09:49 PM IST
Vikas Kumar डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 31 Jan 2020 09:49 PM IST
विज्ञापन
jamia firing: minor can be save Due to this strict law made after Nirbhaya
जामिया में गोली चलाने वाला शख्स - फोटो : अमर उजाला

जामिया में हुए गोलीकांड के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं और दूसरे लोगों ने एक स्वर में आरोपी युवक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी नाबालिग है। दिल्ली पुलिस ने गोली चलाने वाले नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की प्रोटेक्टिव हिरासत में रखने का आदेश दिया गया। 

विज्ञापन


निर्भया कांड के बाद जुवेनाइल जस्टिस कानून में यह सख्त प्रावधान जोड़ा गया था कि गंभीर अपराध करने वाला नाबालिग जो कि 16 से 18 साल के बीच की आयु का है तो उसके खिलाफ बालिग की तरह मामला चलाया जा सकता है। जामिया वाले केस में जो नाबालिग है, उस पर उक्त कानून काम करेगा, ऐसी संभावना कम है। यहां पर एक कानूनी पेंच फंस गया है। 
विज्ञापन


कानून कहता है कि ऐसे मामले में नाबालिग का गंभीर अपराध की श्रेणी वाले केस में शामिल होना आवश्यक है। गंभीर अपराध तभी माना जाएगा जब नाबालिग के खिलाफ दर्ज केस में कम से कम सात साल की सजा दी जा सकती हो। जामिया मामले के आरोपी नाबालिग के खिलाफ जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है, उसमें सात साल की कैद का प्रावधान नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दिल्ली पुलिस ने जामिया में गोली चलाने वाले नाबालिग के खिलाफ हत्या का प्रयास करने और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। कानून के जानकार बताते हैं कि इन दोनों ही धाराओं में सात वर्ष की कैद नहीं बन रही। अगर हत्या के प्रयास वाली धारा को देखते हैं तो उसमें अधिक से अधिक दस वर्ष की सजा दी जा सकती है, लेकिन कम से कम सात साल की कैद मिलेगी, यह कहीं नहीं लिखा है। 


इसी तरह आर्म्स एक्ट में भी पांच साल की सजा का प्रावधान है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने अपनी ओर से नाबालिग के खिलाफ बालिग वाले कानून के दायरे में कार्रवाई करने का प्रयास किया, लेकिन कानूनी पेंच फंसने के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। दिल्ली पुलिस अब आरोपी की सही उम्र का पता लगा रही है। नाबालिग की सही आयु का पता लगाने के लिए आरएमएल अस्पताल को लिखा है। इस तरह के मामलों में मेडिकल बोर्ड गठित किया जाता है। जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड से इजाजत मिलने के बाद नाबालिग का बोन ओसिफिकेशन टेस्ट भी कराया जा सकता है। फिलहाल उसे नाबालिग मानकर पुलिस मामले को आगे बढ़ाएगी। यानी उसका मामला अब जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष चलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed