तो इसलिए तिहाड़ जेल में हुई खूनी वारदात
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राजधानी की तिहाड़ जेल में बुधवार को जेल कर्मी के सामने कैदियों के एक गुट ने एक विचाराधीन कैदी की चाकू से गोदकर हत्या कर दी। हरि नगर थाने में सभी छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। न्यायिक हिरासत में मौत होने से मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। मेडिकल बोर्ड बनने के बाद शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, रविंद्र (29) जेल संख्या-1 के वार्ड संख्या-8 के सी ब्लॉक के चक्की नंबर-1 में बंद था। बुधवार की शाम करीब 6:30 बजे वह गार्ड रूम के सामने से होते हुए सी ब्लॉक की ओर जा रहा था।
उसी समय बी ब्लॉक के सामने खड़े छह अन्य कैदी रविंद्र को पकड़कर ब्लॉक की दीवार से सटे टॉयलेट कॉम्प्लेक्स की ओर जबरन ले गए। रविंद्र किसी तरह से खुद को उनके चंगुल से छुड़ाकर सी ब्लॉक की ओर भागा।
इत तरह पूरी घटना को दिया था अंजाम
दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, रविंद्र को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे अजय, रवि, मुकेश, रियाज, सुशील और विनोद भी भागे और उसे सी ब्लॉक के गेट के पास में पकड़ लिया। अजय और सुशील दोनों रविंद्र के हाथ और पैर पकड़ कर बैठ गए और बाकी के चार आरोपी मुकेश, रियाज, रवि और विनोद चाकूनुमा हथियार से लगातार उसकी छाती, पेट और कमर पर वार करते रहे।
शोर सुनकर जेल के सुरक्षा कर्मी और वार्डर वहां पहुंचे। जेल के सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी कैदियों को पकड़ लिया और उनके पास से चाकू बरामद कर लिए। गंभीर हालत में रविंद्र को डीडीयू अस्पताल ले जाया गया। उसे आईसीयू में भर्ती किया गया।
डॉक्टरों ने सर्जरी कर रविंद्र को बचाने की कोशिश की, लेकिन बुधवार देर रात उसकी मौत हो गई। इस घटना में सभी छह आरोपियों को भी मामूली चोट लगी थी। सभी का जेल अस्पताल में ही इलाज कराया गया।
वार्डर की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा
वार्ड संख्या-8 के वार्डर करमवीर कौशिक की शिकायत पर हरि नगर थाने में सभी छह आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। घटना के बाद क्राइम ब्रांच की टीम भी देर रात तिहाड़ पहुंची और जांच की।
घटनास्थल से मृतक के खून से सने कपड़े और उसकी चप्पल बरामद की गई है। वार्डर ने शिकायत में कहा है कि घटना के समय वह ड्यूटी पर था और गार्ड रूम के बाहर बने चबूतरे पर कुर्सी पर बैठा था। शोर सुनकर वह उस जगह पर पहुंचा और बाकी सुरक्षाकर्मियों को बुलाया लेकिन तब तक रविंद्र को बुरी तरह जख्मी हो गया था।
मृतक रविंद्र वर्ष-2010 से अमन विहार थाना इलाके में हुई हत्या के एक मामले में तिहाड़ में बंद था। जेल संख्या-1 में दो गुट बने हुए थे। रविंद्र भी एक गुट में शामिल था। रविंद्र गुट के कैदी बुधवार को घटना के वक्त उसके साथ नहीं थे, इसी का फायदा उठाकर दूसरे गुट ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया।
कमरे में बंद नहीं करते तो होता बड़ा खून-खराबा
तिहाड़ जेल संख्या एक के अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद जेल कर्मी अगर चौकन्ने नहीं होते तो यहां बुधवार की रात एक की जगह सात कैदियों की मौत हो सकती थी। साथी कैदी की मौत की खबर के बाद 150 से अधिक कैदियों ने बदला लेने की नीयत से जेल अस्पताल में धावा बोल दिया था। जेल कर्मियों ने आरोपियों को रिकॉर्ड रूम में बंद करके बाहर से ताला लगा दिया, जिससे बड़ा खून-खराबा होने से बच गया।
सूत्रों के मुताबिक, रविंद्र की हत्या की खबर जैसे ही जेल में बंद उसके साथियों को मिली, करीब 150 कैदी आरोपियों की तलाश करने लगे। आरोपियों के जेल अस्पताल में होने की सूचना मिलने पर कैदी उसी तरफ गए, लेकिन अस्पताल का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया।
गुस्साए कैदी अस्पताल की दीवार फांद कर वहां पहुंच गए। कैदी सभी छह आरोपियों की तलाश कर रहे थे। डॉक्टर के एक कमरे में ताला बंद था, तो कैदियों को लगा कि इसी कमरे में आरोपियों को छिपा कर रखा गया है। नाराज कैदियों ने उस कमरे की कुंडी तोड़ डाली, लेकिन वे लोग वहां नहीं मिले। कैदियों के बेकाबू होने से तिहाड़-प्रशासन को खतरे की घंटी (अलार्म) बजाना पड़ा। अलार्म बजने के बाद दूसरे जेल के सुरक्षा कर्मी भी सतर्क हो गए।