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'रालेगांव में डांस हुआ था, अब अन्ना क्यों आवाज उठाएंगे'

Sat, 24 Jan 2015 11:22 PM IST
Updated Sat, 24 Jan 2015 11:22 PM IST
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Interview of kumar vishwas

आप के स्टार प्रचारक कवि कुमार विश्वास से खास मुलाकात

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डॉ. कुमार विश्वास जनलोकपाल आंदोलन का भी बड़ा चेहरा थे। और आम आदमी पार्टी (आप) में भी इनकी खास जगह है। कवि विश्वास आप के स्टार प्रचारक हैं।

सियासत के अलावा विश्वास ने अपनी कविताओं से युवाओं की दिल में खास जगह बनाई है। दिल्ली के चुनावी समर में एक बार फिर वह सक्रिय हैं। सियासी व्यस्तता के बीच विश्वास ने बड़ी बेबाकी से अमर उजाला संवाददाता संतोष कुमार से बात की।

आज जीत-हार का क्या पैमाना हो गया है। दल-बदलुओं को टिकट देने की क्या जरूरत पड़ी?
आम आदमी पार्टी जब बनी भी नहीं थी। हमने तब भी मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाई थी, इंडिया गेट पर लाठियां खाकर। निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए। हमारे लिए राजनीति सिर्फ चुनाव नहीं, इसका हिस्सा भर है। रही दूसरी बात तो दूसरी पार्टियों में भी अच्छे लोग हैं।
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बेदी के आने से भाजपा मजबूत हुई है?

Interview of kumar vishwas
आपको नहीं लगता कि किरण बेदी के आने से भाजपा मजबूत हुई है?
किरण बेदी के भाजपा में आने से दो बातें हुईं। एक, भाजपा ने सार्वजनिक रूप से मान लिया कि केजरीवाल से टक्कर को कोई नहीं। दूसरा यह कि भाजपा के नेता डरे हैं। पूर्वांचल के बड़े नेता मनोज तिवारी ने आवाज उठाई तो उन्हें अपमानित किया गया।

आप अपने एक पूर्व सहयोगी को साथ नहीं रख सके। क्या यह आपकी नाकामी नहीं है?
उनका कहना था कि जो पार्टी चंदे का हिसाब न दे, उसे वोट देना गद्दारी है। वो तो आज वहां खड़ी हैं। उन्होंने कहा था कि अपराधियों को जो टिकट देते हैं उसे वोट देना मां-बहन बेटी का अपमान है।

आज वो जहां हैं उनकी सरकार का मंत्री बलात्कार का आरोपी है। पुलिस उसे तलाश कर रही है। तो उनका स्टैंड कहां गया? इससे भाजपा को नुकसान होगा।

'लोकपाल की आवाज उठानी पड़ेगी'

Interview of kumar vishwas
क्या जरूरत पड़ी अन्ना हजारे को कि अब फिर से हमें लोकपाल की आवाज उठानी पड़ेगी।
हां, अन्ना जी ने कुछ दिन पहले कहा है। हम लोकपाल की आवाज उठाएंगे। लेकिन अन्ना जी, आप क्यों आवाज उठाओगे। मिल तो गया आपको लोकपाल।

भ्रष्टाचार खत्म। सारे रिश्वतखोर तिहाड़ में हैं। रालेगांव में डांस में हुआ था। अब कौन सा लोकपाल चाहिए। संसद में दोनों पार्टियों ने मिलकर उल्लू बना दिया था, लेकिन हम तो रामलीला मैदान वाला लोकपाल पास करवाएंगे।
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पार्टी को मंथन करने की जरूरत है?

Interview of kumar vishwas
शांति भूषण का बयान आने के बाद क्या आपको लगता है कि पार्टी को मंथन करने की जरूरत है?
शांति भूषण को लगता है कि केजरीवाल तीसरे नंबर पर हैं। उन्हें प्रेम है। तो ठीक है। उनका निजी बयान है। लेकिन दिल्लीवालों को इससे मतलब नहीं है।

उन्हें सस्ती बिजली-पानी चाहिए। रिश्वतखोरी मुक्त दिल्ली चाहिए। दिल्लीवालों को पता है कि केजरीवाल देगा। उसे कौन सा मतलब है ड्राइंग रूम की बैठकों से या खबरिया चैनलों की बहसों से।

दिल्ली चुनाव में काफी देर से सक्रिय हुए। क्या कोई मनमुटाव था पार्टी से?
ऐसी कोई बात नहीं है। लोक सभा चुनाव के बाद हमारे विदेश में कार्यक्रम थे। वहां से लौटा तो दूसरी जिम्मेदारियां पूरी करने लगा। एक किताब लिखनी थी। हां, पार्टी की पीएसी में हूं। सभी पांचों बैठकों में हिस्सा लिया।

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