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अगले सत्र से सेंट्रल व स्टेट विवि में इंटीग्रेटेड बीएड, ऐसे तैयार होगा कोर्स
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Aug 2018 04:01 AM IST
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सेंट्रल और स्टेट यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक सत्र 2019-20 से इंटीग्रेटेड चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम शुरू होगा। चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड प्रोग्राम में दाखिले का आधार प्रवेश परीक्षा नहीं रहेगी। इंटीग्रेटेड बीएड के लिए प्री स्कूल, प्राइमरी, मिडिल व हाई स्कूल को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम व कोर्स तैयार होगा, ताकि अच्छे शिक्षक तैयार करने के लिए ट्रेनिंग करवाई जा सके।
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केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इंटीग्रेटेड बीएड प्रोग्राम की पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप पर खास फोकस होगा। शिक्षकों के लिए मॉडल टेस्ट बुक, ई-लर्निंग मैटीरियल भी उपलब्ध करवाई जाएगी। इंटीग्रेटेड बीएड के साथ स्पेशलाइजेशन भी करवाने की योजना है। ट्रेंड टीचिंग प्रोफेशनल डिग्री होने पर शिक्षक के रूप में नौकरी के मौके भी उपलब्ध होंगे। इसके अलावा गुणवत्ता युक्त बीएड की पढ़ाई करवाने वाले कॉलेज चलते रहेंगे।
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छात्रों के सीखने की निगरानी करेगी सरकार
ऑस्ट्रेलिया मॉडल के डिजिटल बोर्ड से पढ़ेंगे छात्र
देशभर के सरकारी स्कूलों को ब्लैक बोर्ड से डिजिटल बोर्ड से जोड़ने में ऑस्ट्रेलिया मॉडल के तहत काम होगा। एनसीईआरटी की टीम ऑस्ट्रेलिया में जाकर स्टडी करके आ चुकी है। आगामी पांच सालों तक पंद्रह लाख स्कूलों को जोड़ने की योजना है। इसमें सेटेलाइट, ई लर्निंग समेत अन्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाया जाएगा।
छात्रों के सीखने की निगरानी करेगी सरकार
स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के मकसद से केंद्र सरकार ने तीसरी, पांचवीं व आठवीं कक्षा के छात्रों का नेशनल अस्समेंट सर्वे करवाया था। गणित, सोशल साइंस, साइंस, इंनवायरमेंट साइंस,लैंग्वेज में परीक्षा के आधार पर तैयार रिपोर्ट चौकाने वाली थी।
मैथ्स में सबसे अधिक स्थिति खराब निकली है। इसी के चलते अब सरकार लर्निंग आउटकम बढ़ाने के लिए सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ अस्समेंट तैयार कर रही है। इसमें एनसीईआरटी सहयोग करेगा। सभी राज्यों व यूटी में एक नोडल अधिकारी नियुक्त होगा, जोकि नियमित आकलन करेगा कि तीसरी, पांचवीं व आठवीं कक्षा में छात्र क्या पढ़ रहे हैं? इस नियमित आकलन में आठवीं कक्षा के छात्रों पर मुख्य रूप से फोकस होगा।
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