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Delhi NCR News: सुप्रीम कोर्ट में सरकारी वकीलों की नियुक्ति में एआईबीई पास न करने के दावों की जांच के निर्देश
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह उन दावों की जांच करे, जिनमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त 650 वकीलों में से कुछ ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (एआईबीई) अभी तक पास नहीं किया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने केंद्र को इस संबंध में आठ सप्ताह के अंदर निर्णय लेने का आदेश दिया।
यह निर्देश फर्स्ट जेनरेशन लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में 21 नवंबर 2025 को कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी की गई 650 वकीलों की एम्पैनलमेंट लिस्ट को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सूची में कई नए नामांकित वकील शामिल हैं, जो 2024 या 2025 में ही बार काउंसिल में नामांकित हुए हैं और कुछ ने एआईबीई भी पास नहीं किया है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे अनुभवहीन वकीलों की नियुक्ति से संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत निष्पक्षता और समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन होता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने केंद्र सरकार की ओर से पेश होकर कहा कि याचिकाकर्ता संगठन और उसके अध्यक्ष एडवोकेट रुद्र विक्रम सिंह दिल्ली बार काउंसिल चुनाव में प्रचार के लिए इस पीईएल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंह सोशल मीडिया पर कोर्ट की कार्यवाही और वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग लिंक शेयर कर रहे हैं, जो दिल्ली हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन है। एडवोकेट सिंह ने कोर्ट में आश्वासन दिया कि वे सभी संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर देंगे और पीआईएल का चुनाव प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह उन दावों की जांच करे, जिनमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त 650 वकीलों में से कुछ ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (एआईबीई) अभी तक पास नहीं किया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने केंद्र को इस संबंध में आठ सप्ताह के अंदर निर्णय लेने का आदेश दिया।
यह निर्देश फर्स्ट जेनरेशन लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में 21 नवंबर 2025 को कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी की गई 650 वकीलों की एम्पैनलमेंट लिस्ट को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सूची में कई नए नामांकित वकील शामिल हैं, जो 2024 या 2025 में ही बार काउंसिल में नामांकित हुए हैं और कुछ ने एआईबीई भी पास नहीं किया है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे अनुभवहीन वकीलों की नियुक्ति से संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत निष्पक्षता और समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन होता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने केंद्र सरकार की ओर से पेश होकर कहा कि याचिकाकर्ता संगठन और उसके अध्यक्ष एडवोकेट रुद्र विक्रम सिंह दिल्ली बार काउंसिल चुनाव में प्रचार के लिए इस पीईएल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंह सोशल मीडिया पर कोर्ट की कार्यवाही और वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग लिंक शेयर कर रहे हैं, जो दिल्ली हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन है। एडवोकेट सिंह ने कोर्ट में आश्वासन दिया कि वे सभी संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर देंगे और पीआईएल का चुनाव प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे।
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