डीएनए जांच में रेप की पुष्टि के बाद पीड़िता ने कहा उसने नहीं किया मेरा बलात्कार
डीएनए रिपोर्ट को पीड़िता ने झुठलाया, आरोपी बरी
-डीएनए जांच में दो लोगों द्वारा दुष्कर्म की पुष्टि, पीड़िता ने कहा केवल एक ने किया था दुष्कर्म
-संदेह का लाभ देकर अदालत ने दो युवकों को किया बरी
नई दिल्ली।
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डीएनए और एफएसएल जांच में दो लोगों द्वारा किशोरी के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई, लेकिन पीड़िता ने डीएनए रिपोर्ट को झुठलाते हुए एक युवक को ही आरोपी ठहराया। पीड़िता व पुलिस के बयानों में विरोधाभास और पीड़िता के बयानों में बार-बार बदलाव की स्थिति में अदालत ने कथित दुष्कर्म के दो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार सरपाल ने मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के आधार पर आरोपी अशोक की गिरफ्तारी को संदेहजनक बताते हुए कहा कि पीड़िता और पुलिस के बयानों में विरोधाभास है।
पीड़िता ने अशोक को दुष्कर्म का आरोपी बताया, जबकि डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट में विक्की पर भी दुष्कर्म का आरोप साबित हुआ। ऐसे में पीड़िता और पुलिस के बयान असत्य और अविश्वसनीय लगते हैं।
लिहाजा अदालत अशोक को संदेह का लाभ देते हुए बरी करती है। वहीं, अदालत ने कहा कि विक्की पर किशोरी के अपहरण का चार्ज बनता है, लेकिन किशोरी ने उसके खिलाफ कोई बयान नहीं दिया तो उसे भी अदालत बरी करती है।
पुलिस के रिकॉर्ड के खिलाफ पीड़िता ने दिया बयान
अदालत के समक्ष सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि नाबालिग पीड़िता 10 जनवरी 2012 को अपने घर से लापता हो गई थी। इसके बाद 15 जनवरी को पीड़िता अपने पिता के साथ पुलिस स्टेशन पहुंची और पुलिस को बयान दिया कि वह अपने एक दोस्त विक्की के साथ शाम करीब पांच बजे अक्षरधाम मंदिर देखने गई थी।
लौटते वक्त रात में करीब साढ़े 12 बजे विक्की ने उसे चिल्ला गांव मार्केट में अकेला घर जाने के लिए छोड़ दिया। पीड़िता अकेले घर जाने लगी तो वहां उसे नशे की हालत में अशोक नामक युवक मिला और जबरन एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया।
चार दिन तक उसने बंधक बनाकर दुष्कर्म किया गया। इस मामले में पुलिस ने 16 जनवरी को चार्जशीट दायर की, लेकिन पीड़िता के बयाने के उलट पुलिस ने चार्जशीट में कहा कि उसे पांच दिन तक बंधक बनाकर रखा गया। पीड़िता व पुलिस के मुताबिक एक ही आरोपी की उम्र भी अलग बताई गई।