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मासूम से वसूला गया मां-बाप का कर्ज
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 10 Nov 2015 01:38 AM IST
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दिवाली से चार दिन पहले अनाथ नेहा कुमारी (11) को बेघर कर दिया गया है, वह रहने के लिए आश्रम तलाश रही है। उसने चार साल दिन झाड़ू-पौंछा कर पिता के इलाज में हुआ 30 हजार रुपये कर्ज उतारा।
नेहा ने बताया कि उसके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। वह चार साल तक गांव कड़कड़ मॉडल में एक आंटी के घर में रही, लेकिन अब कर्ज उतरने पर उन्होंने उसे निकाल दिया है।
नेहा के चाचा छपरा में रहते हैं, लेकिन घर का पता उसे नहीं मालूम। कविनगर पुलिस बिहार पुलिस की मदद से उसके चाचा को तलाश रही है।
सोमवार को वह फ्लावर कारोबारी को कविनगर डी-ब्लॉक में मिली तो उन्होंने उसे कविनगर पुलिस के हवाले किया।
नेहा ने बताया कि कड़कड़ निवासी आंटी के दो बच्चे हैं। उनके पड़ोस में ही वह भी माता-पिता के साथ रहती थी। चार साल पहले दिवाली के समय उसके मम्मी-पापा चिड़ियाघर जा रहे थे।
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रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया था। मां की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि पिता ने अस्पताल में तीन दिन बाद दम तोड़ा था। इस दौरान आंटी ने उसके पापा के इलाज में 30 हजार की रकम खर्च की थी।
चार साल तक घर में काम कर उसने कर्ज उतारा। अब आंटी ने उसे घर से निकाल दिया। आंटी ने ही उसे सलाह दी थी कि वह रहने के लिए आश्रम तलाश ले, या फिर काम के लिए दूसरा घर।
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नेहा ने बताया कि उसके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। वह चार साल तक गांव कड़कड़ मॉडल में एक आंटी के घर में रही, लेकिन अब कर्ज उतरने पर उन्होंने उसे निकाल दिया है।
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नेहा के चाचा छपरा में रहते हैं, लेकिन घर का पता उसे नहीं मालूम। कविनगर पुलिस बिहार पुलिस की मदद से उसके चाचा को तलाश रही है।
सोमवार को वह फ्लावर कारोबारी को कविनगर डी-ब्लॉक में मिली तो उन्होंने उसे कविनगर पुलिस के हवाले किया।
नेहा ने बताया कि कड़कड़ निवासी आंटी के दो बच्चे हैं। उनके पड़ोस में ही वह भी माता-पिता के साथ रहती थी। चार साल पहले दिवाली के समय उसके मम्मी-पापा चिड़ियाघर जा रहे थे।
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रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया था। मां की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि पिता ने अस्पताल में तीन दिन बाद दम तोड़ा था। इस दौरान आंटी ने उसके पापा के इलाज में 30 हजार की रकम खर्च की थी।
चार साल तक घर में काम कर उसने कर्ज उतारा। अब आंटी ने उसे घर से निकाल दिया। आंटी ने ही उसे सलाह दी थी कि वह रहने के लिए आश्रम तलाश ले, या फिर काम के लिए दूसरा घर।