महंगाई की मार से छोटा हो गया 'रावण' का कद
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राजधानी में महंगाई का असर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों पर भी पड़ रहा है। पिछले पांच साल के मुकाबले इनकी कीमत चार गुना हो गई है। इतना ही नहीं, पुतले बनाने वाले इनका कद भी कम कर रहे हैं। इसका असर कमेटियों के साथ-साथ पुतले बनाने वालों पर भी हो रहा है।
तितारपुर में सालों से पुतले बनाने वाले एक परिवार के सदस्य सुभाष ने बताया कि महंगाई की वजह से खर्च काफी बढ़ गया। एक पुतला बनाने में 8,000 से 10,000 रुपये खर्च होते हैं लेकिन 15 से 20 हजार रुपये में ही बिकते हैं। इनकी ऊंचाई अब करीब 40 फुट रखी जाती है।
चेहरों में कुछ बदलाव करके पुतलों को आकर्षक बनाया जाता है। एक अन्य कारीगर महेंद्र ने बताया, ‘पांच साल पहले करीब 3,000 रुपये में पुतला तैयार हो जाता था। लगभग 4,000 रुपये की बचत हो जाती थी। उस समय 50 से लेकर 60 फुट ऊंचे पुतले बनाए जाते थे।’ यहां से पुतले हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में भी जाते हैं।
जगह कम होने से काम आधा
टैगोर गार्डन मेट्रो स्टेशन बनने से मुख्य रोड पर जगह काफी कम हो गई है। इसकी वजह से पुतले बनाने का कारोबार आधा रह गया है। पुतले बनाने वाले एक परिवार ने बताया कि एक दशक पहले तक 25-30 परिवार इस कारोबार से जुड़े हुए थे, मगर अब मात्र 12 परिवार ही बचे हैं।
तब हर साल 1000 से अधिक पुतले बनाते जाते थे, लेकिन अब मुश्किल से 500 ही बन पाते हैं। हालांकि बारिश से बचाने के लिए कारीगर पुतलों को मेट्रो लाइन के नीचे डिवाइडर में रखते हैं।
तितारपुर में करीब 35 वर्ष पहले मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति ने पुतले बनाना शुरू किया था। जिसकी बाबा रावण वाला के नाम से पहचान बन गई थी। कुछ वर्षों में गांव के करीब 50 परिवार इस कार्य से जुड़ गए।