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देश के सबसे पुराने और ऊंचे गांव को जरूर देखना चाहेंगे

Sun, 09 Nov 2014 12:29 AM IST
Updated Sun, 09 Nov 2014 12:29 AM IST
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india's oldest and highest village kee gopa

प्रगति मैदान में बाल दिवस के मौके पर शुक्रवार से शुरू होने जा रहे इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में आने वाले दर्शकों को देश के सबसे पुराने व ऊंचाई पर स्थित की-गोंपा गांव को देखने का मौका भी मिलेगा, जोकि हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में स्थित है।

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खास बात यह है कि 11वीं शताब्दी में स्थापित गांव को वर्ष 1975 में आए सबसे बड़े भूकंप के बाद दोबारा बसाया गया है। फिलहाल यहां तिब्बतियों की मॉनेस्टिी है, जहां देसी-विदेशी बौद्ध भिक्षुओं समेत पर्यटक भी पहुचंते हैं।
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इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में हिमाचल सरकार दर्शकों को हिमाचल की हसीन वादियों के साथ-साथ अनछुए पहलुओं की भी जानकारी देगी। अनदेखा-अंजाना हिमाचल और जीव-जंतु व वनस्पति थीम के आधार पर पवेलियन को तैयार किया जा रहा है।

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17 हजार फीट ऊंचाई पर बसा है गांव

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पवेलियन के रेंज अधिकारी कुलदीप सिंह जायसवाल के मुताबिक, पवेलियन के बाहर हिमाचल की दो प्रमुख चोटियों लाहौल स्पीति व किन्नौर, जिसे हिमालय का तलहटी भी कहा जाता है को उकेरा जा रहा है।

बर्फ की वादियों में ढकी चोटियों के नीचे बसा देश का सबसे पुराना व ऊंचा गांव की-गोंपा भी यहां दर्शाया जाएगा, जोकि 17 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है।

आर्टिस्ट सीडी मोदगिल के मुताबिक, पवेलियन के किनारे देवदार समेत चौड़ी पत्ते वाले वन व 12 प्रकार की वनस्पति के पौधे भी रखे जाएंगे। इसमें अर्जुन, एलोवेरा, दाडू, अश्वगंधा, हरड़, त्रिफला, भेड़ा आदि शामिल होंगे। जबकि हिमाचल का दुर्लभ राज्य पक्षी जुजुगुणा और राज्य पशु बर्फानी तेंदुआ पहली बार मेले में पहुंचेंगे।

पौंग झील के साइबेरियन क्रेन भी दिखेंगे

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इसके अलावा पहाड़ों के जीव-जंतु जैसे- काला भालू, कोकलाश, मोनाल, चकौर, लाल जंगली मुर्गा भी दिखेगा। इसके अलावा दर्शकों को हिमाचल के दूरदराज के इलाकों में भेड़ों का व्यवसाय करने वाले गद्दी समुदाय व उनके धण (भेड़-बकरी के झुंड) के भी दीदार होंगे।

यहां दर्शकों को हिमाचल में कृत्रिम पौंग झील में सर्दियों में आने वाले विदेशी पक्षियों के बारे में भी बताया जाएगा, जिसमें साइबेरिन क्रेन मुख्य है। यह साइबेरियन क्रेन नंवबर से अप्रैल की शुरुआत तक हिमाचल की वादियों में बसते हैं और प्रजनन के बाद गर्मी शुरू होते ही अपने देशों के ठिकानों को लौट जाते हैं।

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