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जहरीली हवा से निजात के लिए अन्य देशों से सीख सकता है भारत

Mon, 18 Nov 2019 05:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 18 Nov 2019 05:24 AM IST
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India can learn from other countries to get rid of poisonous air
demo pic - फोटो : अमर उजाला

पूरे उत्तर भारत में खतरनाक वायु प्रदूषण एक सालाना घटना हो गई है। भारत अन्य देशों में योजनाबद्ध नीतियों और तकनीकी की मदद से गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या से निजात पाने की कला सीख सकता है। 

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खतरनाक वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए चीन जैसे कई देशों ने कई सालों से तकनीक अपना कर और कोयला जलाने और उत्सर्जन पर रोक लगाने की नीतियों का सहारा लिया। इस दिशा में पूर्वी चीन के नानजिंग प्रांत में खड़े पेड़ों का जंगल तैयार किया गया। 
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चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के सर्वे में बताया गया है कि यह वन हर साल 25 टन कार्बन डाइऑक्साइड सोख लेता है और रोजाना करीब 60 किलो ऑक्सीजन पैदा करता है। इसके अलावा उत्तरी चीन में प्रयोग के तौर पर 100 मीटर से ऊंचा स्मॉग टावर बनाया गया। इसके बाद वायु की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया।
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अमेरिका के ओहियो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भाविक बख्शी ने बताया कि कई देशों ने प्रदूषण को कम करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जिनका भारत भी प्रयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें निश्चित स्रोत जैसे उद्योगों द्वारा उत्सर्जन की सीमा तय करने के लिए नियम बनाने से लेकर तकनीक की मदद से कारों में यंत्र लगाने का प्रयोग कर सकता है। 

उन्होंने कहा कि प्रदूषण के निश्चित स्रोत कारखाने और रिफाइनरी हैं, जबकि अनिश्चित स्रोतों का पता लगाना कठिन होता है। जैसे निर्माण स्थल और वन भूमि आदि शामिल हैं। 


संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के एशिया प्रशांत क्षेत्र के निदेशक टेशेन शेरिंग ने कहा कि चीन दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों का घर था, लेकिन उसने कुछ सालों के दौरान हालात पर नियंत्रण पा लिया। एक विकासशील देश में बड़े शहर की आर्थिक वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के बीच में संतुलन बनाने का यह एक अच्छा उदाहरण है।

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